शनिवार 11 जुलाई 2026 - 09:28
शहीद रहबर की शहादत ने धरती को ईश्वर की सबसे बड़ी बरकतों में से एक से वंचित कर दिया।हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हाशिमी

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हाशिमी ने कहां,शहीद रहबर का इस्लामी उम्मत के मार्गदर्शन में अद्वितीय स्थान था और उनकी शहादत ने मुस्लिम समाज को ईश्वर की सबसे बड़ी नेमतों और बरकतों में से एक से वंचित कर दिया।उन्होंने कहा कि पवित्र क़ुरआन धरती से बरकतों के कम होने को ईश्वरीय व्यक्तित्वों और धर्म के महान नेताओं के अभाव से जोड़ता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हाशिमी ने कहां,शहीद रहबर का इस्लामी उम्मत के मार्गदर्शन में अद्वितीय स्थान था और उनकी शहादत ने मुस्लिम समाज को ईश्वर की सबसे बड़ी नेमतों और बरकतों में से एक से वंचित कर दिया।उन्होंने कहा कि पवित्र क़ुरआन धरती से बरकतों के कम होने को ईश्वरीय व्यक्तित्वों और धर्म के महान नेताओं के अभाव से जोड़ता है।

उन्होंने कहा कि पवित्र क़ुरआन धरती से बरकतों के कम होने को ईश्वरीय व्यक्तित्वों और धर्म के महान नेताओं के अभाव से जोड़ता है।शहीद रहबर की शहादत इस्लामी उम्मत के लिए एक बड़ी क्षति है और समाज की बरकतों में कमी का स्पष्ट उदाहरण है।

उन्होंने इमाम सज्जाद (अ.स.) की शहादत की बरसी तथा शहीद रहबर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ईश्वरीय नेता समाज के मज़बूत स्तंभ होते हैं। उनका अभाव इस्लामी जगत के लिए एक भारी नुकसान है, लेकिन ईमानदार जनता विलायत के मार्ग पर दृढ़ रहते हुए इस रास्ते को आगे बढ़ाएगी।

हाशिमी ने कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन से संबंधित कुछ समस्याओं का उल्लेख करते हुए ज़िला और प्रांतीय अधिकारियों से अपील की कि वे क़ानून का पालन करते हुए जनता के अधिकारों की रक्षा करें, मनमाने फ़ैसलों से बचें तथा समाज में शांति और विश्वास का वातावरण बनाए रखें।

उन्होंने इस विषय में प्रयास करने के लिए ज़िलाधिकारी, लोक अभियोजक, पुलिस तथा अन्य अधिकारियों का धन्यवाद भी व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि क़ानून का क्रियान्वयन दूरदर्शिता, न्याय और सामाजिक शांति के साथ होना चाहिए। आज के संवेदनशील समय में दुश्मन हर प्रकार के मतभेद और असंतोष का लाभ उठाना चाहता हैं, इसलिए अधिकारियों को आपसी समन्वय और जनहित को ध्यान में रखते हुए सामाजिक तनाव से बचना चाहिए।

उन्होने शहीद रहबर के जनाज़े में उमड़ी भारी भीड़ का उल्लेख करते हुए कहा कि तेहरान, क़ुम, मशहद, नजफ़ और कर्बला में लाखों लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहीदों का ख़ून कभी भुलाया नहीं जा सकता और ईरान की जनता तथा इस्लामी दुनिया इस अपराध के दोषियों को दंडित किए जाने की मांग करती है।

उन्होंने क़ुरआन की क़िसास संबंधी आयतों का हवाला देते हुए कहा कि क़िसास व्यक्तिगत प्रतिशोध का नाम नहीं, बल्कि समाज के जीवन और सुरक्षा की गारंटी है। क़ुरआन इसे अपराधों की रोकथाम और मानव जीवन की रक्षा का माध्यम बताता है। इसलिए इस अपराध के योजनाकारों और दोषियों को सज़ा देना एक धार्मिक, जनसामान्य और इस्लामी मांग है।

अंत में उन्होंने कहा कि आज केवल कूटनीति दुश्मनों के अपराधों का पर्याप्त उत्तर नहीं है। जनता की सक्रिय भागीदारी बनाए रखना, प्रतिरोध मोर्चे को मज़बूत करना, क्रांति के शहीदों, कमांडरों, वैज्ञानिकों और निर्दोष बच्चों के ख़ून का न्याय मांगना तथा राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना ही इस्लाम के दुश्मनों का मुक़ाबला करने का सबसे प्रभावी मार्ग है। उन्होंने कहा कि ईरान की जनता इस मांग की पूर्ति तक पीछे नहीं हटेगी।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha