हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, शहीद-ए-उम्मत, इस्लामी क्रांति के नेता, आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई के दफ़्न के अवसर पर मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद की ओर से जामा मस्जिद तहसीनगंज, लखनऊ में क़ुरआन-ख़्वानी और मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत क़ुरआन-ख़्वानी से हुई, जिसका आरंभ तंज़ीमुल मकातिब के छात्र क़ारी मुहम्मद रैहान ने किया।

इसके बाद हौज़ा-ए-इल्मिया हज़रत ग़ुफ़रान मआब के शिक्षक मौलाना क़ारी मुहम्मद मेहदी ने पवित्र क़ुरआन का पाठ किया। उनके बाद प्रसिद्ध क़ारी मुहम्मद फ़ुरक़ान ने क़ुरआन की आयतों का पाठ किया और अंत में प्रसिद्ध क़ारी क़ारी बदरुद्दुजा ने तिलावत की।
क़ुरआन-ख़्वानी के बाद मौलाना हैदर अब्बास रिज़वी ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद रहबर ने केवल क़ुरआन को याद करने (हिफ़्ज़) पर ही नहीं, बल्कि उसके अर्थ और संदेश को समझने पर भी ज़ोर दिया। इसका प्रमाण ईरान में उनके जनाज़े के अवसर पर विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति और उस अवसर पर क़ुरआन की आयतों के पाठ के रूप में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इस समय दुश्मन एकता के इस सुखद वातावरण से भयभीत है, इसलिए हमें इस माहौल को बनाए रखना चाहिए।
मौलाना सईदुल हसन ने कहा कि वास्तव में इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई उम्मत के शहीद हैं, क्योंकि उन्होंने मुस्लिम उम्मत की प्रतिष्ठा और इस्लाम की उन्नति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उनकी अंतिम यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि वे जनता के बीच कितने लोकप्रिय थे।

मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना हसनैन बाक़री ने कहा कि अल्लाह ने लोगों के दिलों में शहीद आयतुल्लाह ख़ामेनई का प्रेम स्थापित कर दिया था, जिसका प्रमाण उनकी अंतिम यात्रा में दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया की नज़र ईरान पर है। धर्म और समुदाय के भेदभाव के बिना लोगों का उनके जनाज़े में शामिल होना उनकी लोकप्रियता का स्पष्ट प्रमाण है। विशेष रूप से इराक़ में जो दृश्य देखने को मिला, वह अत्यंत आश्चर्यजनक था। यह पहला ऐसा जनाज़ा था जिसकी दूसरे देश में इतनी भव्य अंतिम यात्रा निकाली गई।
मजलिस में मौलाना निसार अहमद ज़ैनपुरी, मौलाना कल्ब अहमद, मौलाना मकातिब अली, मौलाना अली हाशिम, मौलाना मुहम्मद मेहदी, मौलाना मुहम्मद हुसैन, डॉक्टर ज़फ़रुन्नक़ी, मौलाना इनआम रज़ा, मौलाना मंज़र अब्बास, जनाब इमदाद इमाम, मौलाना मुर्तज़ा हुसैन, मौलाना रज़ा अब्बास, शेख़ अली हाशिम नजफ़ी, मौलाना आदिल फ़राज़, जामिया इमामिया, तंज़ीमुल मकातिब तथा हौज़ा-ए-इल्मिया हज़रत ग़ुफ़रान के छात्र एवं बड़ी संख्या में मोमिन पुरुषों और महिलाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन मौलाना हैदर अब्बास ने किया।
प्रसिद्ध शायर मौलाना साबिर अली उमरानी ने शहीद रहबर की शान में अपनी काव्यात्मक श्रद्धांजलि प्रस्तुत की।
इस कार्यक्रम का आयोजन मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद की ओर से किया गया।



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