हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामी क्रांति के नेता हज़रत आयतुल्लाह सैय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामनेई ने न्याय सप्ताह और आयतुल्लाह शहीद बहश्ती तथा उनके साथियों की बरसी के अवसर पर एक संदेश जारी किया है।
क्रांति के नेता के संदेश का पूर्ण पाठ निम्नलिखित है:
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
मैं अहले-बैत (अ) के दुखद दिनों, हज़रत सय्यद-उश-शोहदा और उनके साथियों पर सलाम हो और उनके वफ़ादार साथियों की शहादत पर ईरानी राष्ट्र और पूरी मुस्लिम उम्मत को तसलीयत पेश करता हूँ।
हुसैनी आंदोलन और क़याम, हक़ की स्थापना, उम्मत की सुधार, ज़ुल्म के खिलाफ़ संघर्ष और हक़ व बातिल तथा न्याय व अन्याय के बीच ऐतिहासिक लड़ाई का एक सर्वोच्च उदाहरण है, जिसमें पूरी दुनिया के स्वतंत्र विचार रखने वालों के लिए अमूल्य और अविस्मरणीय सबक मौजूद हैं।
सय्यद-उश-शुहदा के ख़ून को “ख़ून-ए-ख़ुदा” कहा जाता है, जो सृष्टि की रगों में प्रवाहित होकर जीवन देने वाले संघर्षों को जन्म देता है।
इस्लामी क्रांति आंदोलन, चूंकि इसी पवित्र स्रोत की एक शाखा है, इसलिए उसे हमेशा हुसैनी आंदोलन के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। हर वर्ष 28 जून उस महान क्रांतिकारी व्यक्तित्व की याद को ताज़ा करता है, जिन्होंने न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में दिन-रात संघर्ष किया और अंततः अपने साथियों के साथ शहादत प्राप्त की। उनकी और उनके 72 साथियों की शहादत इस व्यवस्था के हुसैनी चरित्र का स्पष्ट प्रमाण है।
इस्लामी गणराज्य में न्यायपालिका का स्थान जनता के अधिकारों की रक्षा, सामूहिक अधिकारों की बहाली, वैध स्वतंत्रताओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष, न्याय के लागूकरण, ईश्वरीय सीमाओं के पालन और कानून के कार्यान्वयन की निगरानी है। इस मार्ग की सफलता जनता के विश्वास को और मजबूत करती है।
सभी संस्थानों और सरकारी निकायों से अपेक्षा है कि वे अपने कार्य को इस्लामी गणराज्य के मानकों और राष्ट्र के उच्च स्थान के अनुरूप बनाएँ और सुधारते रहें। न्यायपालिका को इस क्षेत्र में विशेष और अद्वितीय भूमिका प्राप्त है कि वह अन्य संस्थानों के सुधार का माध्यम बने और स्वयं भी निरंतर सुधार करती रहे।
आज समाज की मुख्य अपेक्षा यह है कि न्यायपालिका की कार्यप्रणाली में वास्तविक परिवर्तन दिखाई दे, न कि केवल कागज़ों और योजनाओं तक सीमित रहे, बल्कि इसका प्रभाव अदालतों, प्रशासनिक कार्यों और समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
न्यायपालिका ऐसी होनी चाहिए कि हर पीड़ित व्यक्ति उसे अपना सुरक्षित सहारा समझे, और कोई भी शक्तिशाली व्यक्ति दूसरों के अधिकारों पर हाथ डालने की हिम्मत न करे। सिफारिश और संबंधों के आधार पर हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त हो जाए।
जनता के अधिकार केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा, समान अवसर, प्राकृतिक संसाधनों का न्यायपूर्ण उपयोग, स्वास्थ्य, स्वतंत्रता और प्रभावी शासन जैसे सामूहिक अधिकार भी इसमें शामिल हैं।
इस संवेदनशील समय में सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक मुद्दों में से एक यह है कि 2025 और 2026 में अंतरराष्ट्रीय अपराधियों और आक्रामक शक्तियों द्वारा किए गए अपराधों के कारण हुए नुकसान की जांच और उनकी वसूली की जाए।
युद्धों के शहीदों से लेकर मीनाब और लामर्द में बच्चों की हत्या, अस्पतालों और सार्वजनिक सेवाओं पर हमले, नवजात शिशुओं और बुज़ुर्गों की हत्या तक, और सबसे बढ़कर महान नेतृत्वकर्ता की शहादत—ये सभी गंभीर कानूनी मामले हैं जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अदालतों में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
अपराधियों को निश्चित रूप से उनके कर्मों की सज़ा तक पहुँचाया जाएगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ शत्रु नेताओं द्वारा इन अपराधों की खुली स्वीकारोक्ति स्वयं एक कानूनी प्रमाण है, जो न्यायिक कार्रवाई को मजबूत आधार प्रदान करती है।
दूसरा, पिछले वर्ष जून में दिए गए निर्देशों के अनुसार इन अपराधों की जांच का दायरा विस्तृत किया जाना चाहिए और इसे तब तक जारी रखा जाना चाहिए जब तक अंतिम निर्णय और उसका कार्यान्वयन न हो जाए।
न्यायिक सुधार और इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक कदम पहले भी बताए जा चुके हैं, जिन पर गंभीरता से अमल आवश्यक है।
न्याय की स्थापना और अन्याय के खिलाफ संघर्ष कठिन है, लेकिन यह ईमानदारी, धैर्य, परहेज़गारी, साहस, तकनीक के सही उपयोग और बुद्धिमत्ता से संभव है।
इन सभी कार्यों की पूर्णता, ईश्वर की इच्छा से, हमारे समय के न्यायप्रिय नेता (इमाम महदी अ) के ज़ुहूर से संभव होगी।
सय्यद मुजतबा हुसैनी ख़ामनेई
28 जून 2026
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