शुक्रवार 17 जुलाई 2026 - 13:06
धार्मिक छात्राएँ, प्रतिरोध और अरबईन के संदेश की वास्तविक संदेशवाहक हैं: सुश्री सारा तालेबी

महिला इस्लामी शिक्षण संस्थानों की सांस्कृतिक एवं प्रचार-प्रसार मामलों की सहायक, सुश्री सारा तालेबी ने "जिहाद-ए-तबयीन" (सत्य एवं वास्तविकता को स्पष्ट करने के प्रयास) में महिलाओं की अद्वितीय भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इस वर्ष का महान अरबईन, ईरानी राष्ट्र की आशूराई परंपरा की निरंतरता, प्रतिरोध मोर्चे की उपलब्धियों की व्याख्या और मुस्लिम उम्मत की एकता का प्रतीक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में हौज़ा की छात्राओं पर एक विशेष और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, सारा तालेबी ने अरबईन 2026 के प्रचारकों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में अरबईन के दौरान इस्लामी क्रांति के प्रतीकों की उपस्थिति को लेकर प्रश्न उठाए जाते थे, लेकिन इस्लामी क्रांति के शहीद सर्वोच्च नेता की निष्ठा और महान व्यक्तित्व ने उन्हें आज अहले बैत (अ.) के प्रेमियों के दिलों में अरबईन के प्रथम ज़ायर के रूप में स्थान दिलाया है और इस क्रम को इस वर्ष के अरबईन में और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष अरबईन का आयोजन मुस्लिम उम्मत की एकता, आशूरा और अरबईन की वास्तविक भावना के प्रचार तथा ईरानी राष्ट्र के त्याग और शहादत से लिखे गए इतिहास के संदेश के साथ होना चाहिए। साथ ही प्रतिरोध मोर्चे के संदेश को एक वैश्विक विचारधारा के रूप में दुनिया के सभी स्वतंत्र लोगों और उत्पीड़ित समुदायों तक पहुँचाया जाना चाहिए।

सांस्कृतिक एवं प्रचार-प्रसार मामलों की सहायक ने हज़रत ज़ैनब (स.) की आशूरा के संदेश को जीवित रखने में निभाई गई भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार अरबईन, कर्बला की घटना के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम बना, उसी प्रकार आज हौज़ा की छात्राओं को हज़रत ज़ैनब (स.) के जीवन को आदर्श बनाकर प्रतिरोध मोर्चे की महत्वपूर्ण घटनाओं की सच्ची संदेशवाहक बनना चाहिए और शत्रु के मीडिया को तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने का अवसर नहीं देना चाहिए।

उन्होंने प्रचार-प्रसार गतिविधियों में क़ुरआनी शिक्षाओं के उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विशेष रूप से सूरह अल-फ़ज्र पर चिंतन, ईमान के मोर्चे और असत्य के मोर्चे के बीच संघर्ष तथा गलत आकलनों के परिणामों की व्याख्या, अरबईन के प्रचारकों के लिए महत्वपूर्ण बौद्धिक और प्रचारात्मक विषय बन सकती है।

सुश्री सारा तालेबी ने बताया कि इस्लामी क्रांति के शहीद सर्वोच्च नेता के 37 वर्षों के नेतृत्व पर आधारित एक विशेष संकलन फ़ारसी, अरबी और अंग्रेज़ी भाषाओं में तैयार किया गया है, जिसका उपयोग अरबईन के प्रचार कार्यक्रमों में किया जा सकता है, ताकि इस्लामी क्रांति के वैचारिक, बौद्धिक और सभ्यतागत पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।

उन्होंने आगे कहा कि महिला हौज़ा संस्थानों में काफी समय पहले से महिला प्रचारकों के विशेष प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री की तैयारी शुरू की जा चुकी है तथा अरबईन के दौरान विभिन्न मवाकिब (सेवा शिविरों) और सांस्कृतिक केंद्रों में छात्राओं की तैनाती के लिए पूरी तैयारी है, ताकि वे प्रचार और सांस्कृतिक सेवा के क्षेत्र में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

उन्होंने अरबईन की स्थापना और उसके निरंतर विस्तार में महिलाओं की निर्णायक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अनेक विशेषज्ञों के अनुसार यदि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी न होती, तो आज अरबईन का यह विशाल आयोजन वर्तमान स्वरूप में अस्तित्व में नहीं आ पाता। इसलिए एक प्रभावी प्रचार, मीडिया और अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के लिए महिलाओं की क्षमताओं का पहले से अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विरोधी शक्तियाँ संदेह उत्पन्न करके और तथ्यों को विकृत करके मुस्लिम समाजों तथा प्रतिरोध मोर्चे के संकल्प को कमजोर करना चाहती हैं। इसलिए आवश्यक है कि महिला और पुरुष प्रचारकों को सशक्त, प्रमाणिक और आधुनिक बौद्धिक सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे इन शंकाओं और आपत्तियों का प्रभावी उत्तर दे सकें।

अंत में सारा तालेबी ने सर्वोच्च नेता के उस दृष्टिकोण का उल्लेख किया कि अमेरिका को इस क्षेत्र से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाजों को यह समझाना होगा कि महाशक्तियों पर निर्भरता न तो सम्मान देती है और न ही वास्तविक शांति, बल्कि इससे क्षेत्र के देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

उनके अनुसार, अरबईन पूरे मुस्लिम उम्मत तक इस संदेश को पहुँचाने और प्रतिरोध की विचारधारा को अधिक सुदृढ़ बनाने का सर्वोत्तम अवसर है।

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