गुरुवार 16 जुलाई 2026 - 16:33
आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी की अरबईन के प्रचारकों को नसीहत; क़ुरआन और अहले बैत (अ) की शिक्षाओं के प्रकाश में आशूरा का संदेश आम करें

आयतुल्लाहिल उज़्मा जाफ़र सुबहानी ने अरबईन 2026 के प्रचारकों के एक सम्मेलन के नाम अपने संदेश में जोर दिया है कि प्रचारक अपने प्रचार को पवित्र क़ुरआन, प्रामाणिक हदीसों और अहले बैत (अ) की विश्वसनीय शिक्षाओं पर आधारित करें तथा वर्तमान युग की आवश्यकताओं के अनुसार आशूरा के संदेश को ज़ायरीन तक पहुँचाएँ।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाहिल उज़्मा जाफ़र सुबहानी ने ईरान में अरबईन के प्रचारकों के सम्मेलन के नाम अपने संदेश में कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) का आंदोलन शिया मत की आध्यात्मिक शक्ति का प्रमुख स्रोत है। इसलिए प्रचारकों को ज़ायरीन के सामने सैयदुश्शोहदा इमाम हुसैन (अ) और उनके वफ़ादार साथियों के जीवन, उनके गुणों तथा उनके बलिदानों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रचारकों की बातें पवित्र क़ुरआन, पैग़म्बर मुहम्मद (स) की सुन्नत और अहले बैत (अ) की प्रामाणिक शिक्षाओं पर आधारित होनी चाहिए। अप्रमाणिक रिवायतों, कमजोर कथनों और अंधविश्वासों से बचना चाहिए तथा धार्मिक शिक्षाओं को तर्कसंगत प्रमाणों और क़ुरआनी साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

आयतुल्लाह सुबहानी ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी प्रचारक का व्यावहारिक जीवन उसके उपदेश से अधिक प्रभावशाली होता है। उन्होंने अच्छे आचरण, विनम्रता, धैर्य, सौम्य व्यवहार, ज़ायरीन के साथ सद्व्यवहार, विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के प्रति सम्मान तथा बुद्धिमत्ता के साथ प्रश्नों के उत्तर देने को सफल प्रचार की मूल विशेषताएँ बताया।

उन्होंने कहा कि प्रचारकों को आशूरा के संदेश को वर्तमान समय की समस्याओं और मुस्लिम उम्मत की आवश्यकताओं से जोड़कर प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी इस महान आंदोलन के वास्तविक उद्देश्यों को बेहतर ढंग से समझ सके।

अपने संदेश में उन्होंने इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि ज़ायरीन को ज़ियारत के दर्शन, अहले बैत (अ) के साथ अपने संकल्प के नवीनीकरण, ईमान और धार्मिक समझ में वृद्धि तथा ज़ियारतों के उच्च आध्यात्मिक विषयों से परिचित कराना भी प्रचारकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

आयतुल्लाह सुबहानी ने ज़ायरीन को ज़ियारत के शिष्टाचार, दूसरों के अधिकारों, अनुशासन और पवित्र स्थलों के सम्मान का पालन करने की भी हिदायत दी। उन्होंने कहा कि ज़ियारत को केवल मनोरंजन या उत्सव का रूप नहीं देना चाहिए, बल्कि इसे इबादत, आध्यात्मिक ज्ञान और आशूरा की घटना की स्मृति के साथ संपन्न करना चाहिए।

अपने संदेश के अंत में आयतुल्लाह सुबहानी ने लाखों ज़ायरीन की मेहमाननवाज़ी के लिए इराक की जनता, उलेमा, अतबात-ए-आलियात के जिम्मेदार अधिकारियों और सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने इसे ईरान और इराक के बीच भाईचारे, प्रेम और मक्तब-ए-हुसैनी की बरकतों का उज्ज्वल प्रतीक बताया।

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