हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल-इस्लाम शेख इब्राहीम ज़कज़ाकी के शिष्यों और अनुयायियों के एक काफले ने आज सुबह नजफ अशरफ के इलाके सौरत-उल-इशरीन से कर्बला-ए-मौआल्ला की ओर अरबईन-ए-हुसैनी की पदयात्रा शुरू कर दी।
काफला सुबह साढ़े छह बजे रवाना हुआ। रवानगी से पहले इस वर्ष के अरबईन काफिले के जिम्मेदार हुज्जतुल-इस्लाम शेख अलियू तिर्मिज़ी कादूना ने एक संक्षिप्त संबोधन में आशूरा के पैग़ाम और हज़रत इमाम हुसैन (अ) के क़ियाम के उद्देश्यों को ज़िंदा रखने की अहमियत पर जोर दिया।
काफले में शामिल लोगों ने नियम-अनुशासन और रूहानी माहौल के साथ इस सफ़र की शुरुआत की और अहलेबैत-ए-अतहार (अ) की मुसीबतों पर ग़म और मातम का इज़हार किया। आयोजकों के अनुसार, इस पदयात्रा का उद्देश्य केवल अरबईन को याद करना नहीं है, बल्कि कर्बला से शाम तक अहलेबैत (अ) की असीरी के दौरान झेली गईं तकलीफ़ों को व्यावहारिक रूप से महसूस करना भी है।
ज़ाइरीन रास्ते भर नौहा-ख़्वानी, मर्सिया-ख़्वानी और हुसैनी नारों की गूंज के साथ कर्बला-ए-मौआल्ला की ओर बढ़ रहे हैं, ताकि अरबईन के विशाल सम्मेलन में शिरकत कर सकें।
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