हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बड़ा गांव, घोसी, मऊ में समाज सुधार की आवश्यकता और महत्व को देखते हुए इस्लामी विचारक, कुरआन के व्याख्याकार और विलायत के समर्थक हज़रत अल्लामा सय्यद अकीलुल ग़रवी की निगरानी और मार्गदर्शन में 18 सितंबर, शुक्रवार को दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक मदरसा हुसैनिया घोसी में पूर्वांचल के उलेमा और वाअज़ीन की सभा तथा मदरसा हुसैनिया घोसी के संयुक्त सहयोग से एक दिवसीय शैक्षिक, प्रशिक्षण एवं सुधारात्मक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि और विशेष वक्ता हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही, जो भारत के लिए वली-ए-फकीह के प्रतिनिधि हैं, ने अपने संबोधन में कहा कि विद्वानो की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी का ऐसा प्रशिक्षण करें कि वह अपने देश और कौम की बेहतर सेवा करने के योग्य बन सके।
उन्होंने शिया समाज की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शिया समाज के पास ऐसे अनमोल आध्यात्मिक और धार्मिक संसाधन हैं, जिनसे बहुत से समाज वंचित हैं। कुरआन एक अनमोल पूंजी है, अहले-बैत अनमोल पूंजी हैं, हज़रत फातिमा ज़हरा अनमोल पूंजी हैं, हज़रत अबुल फज़्ल अब्बास अनमोल पूंजी हैं, हज़रत ज़ैनब अनमोल पूंजी हैं, सकीना बिन्तुल हुसैन अनमोल पूंजी हैं, हज़रत मासूमा कुम अनमोल पूंजी हैं और इमाम-ए-जमाना अनमोल पूंजी हैं। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इन महान हस्तियों से प्राप्त इस अनमोल विरासत का सम्मान करें और इसकी रक्षा करें।
घोसी, मऊ में भारत मे सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन हकीम इलाही के पहुंचने पर पूर्वांचल के उलेमा और मोमिनों ने उनका शानदार और उत्साहपूर्ण स्वागत किया।
लंदन से कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए प्रसिद्ध वक्ता हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन अकीलुल ग़रवी ने कहा कि जब तक दुनिया में मानव समाज का अस्तित्व रहेगा, तब तक सुधार की आवश्यकता भी बनी रहेगी। जब तक अच्छाई और बुराई मौजूद रहेंगी, तब तक सुधार की आवश्यकता भी बनी रहेगी।
अल्लामा ने मौला अली अलैहिस्सलाम का प्रसिद्ध कथन प्रस्तुत करते हुए कहा कि “अल्लाह ने जाहिलों से सीखने का वादा बाद में लिया, पहले विद्वानों से यह वादा लिया कि वे जाहिलों को ज्ञान सिखाएंगे।” इसलिए जाहिल लोग गलतियां और शरारतें करते रहेंगे, लेकिन विद्वानो का कर्तव्य है कि वे धैर्य के साथ उन्हें ज्ञान सिखाएं।
मौलाना ने आगे कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी स्वयं इस्लाम की एक पहचान है। अर्थात अज़ादारी अपने आप में इस्लाम की ऐसी निशानी है, जो इस्लाम के अस्तित्व, उसकी स्थिरता और उसके वास्तविक संदेश को दुनिया के सामने पेश करती है।
हुज्जतुल-इस्लाम अकीलुल ग़रवी ने लगभग आधे घंटे तक संबोधित किया। उनका पूरा संबोधन कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई बड़ी एलसीडी स्क्रीन पर लाइव प्रसारित किया गया, जिसे सभी उपस्थित लोगों और श्रोताओं ने ध्यानपूर्वक देखा और सुना।
इनके अलावा कई अन्य विद्वानो ने विभिन्न विषयों पर भाषण दिए। इनमें मौलाना नाज़िम अली वाअज़ ने “वर्तमान समय में विद्वानो की जिम्मेदारियां”, मौलाना सय्यद तकी हैदर नकवी, दिल्ली ने “समाज सुधार”, मौलाना इरफान अब्बास ने “समाज में अम्र बिल मारूफ और नहीं अनिल मुनकर की कमी”, मौलाना मज़ाहिर हुसैन ने “अज़ादारी में की गई गलत परंपराएं और हमारी जिम्मेदारियां”, मौलाना मिनहाल रज़ा खैराबादी ने “अनावश्यक रीति-रिवाजों का तत्काल समाधान”, मौलाना हसन रज़ा ने “वर्तमान समय में अज़ादारी और अज़ादार”, मौलाना रईस हैदर वाअज़ ने “ज्ञान के बिना कौम की तरक्की संभव नहीं”, मौलाना मुहम्मद मेहदी हुसैनी ने “वर्तमान समय में शिक्षा हमारे समाज की महत्वपूर्ण आवश्यकता” और मौलाना नसीमुल हसन ने “अज़ादारी हमारी विरासत और उसकी रक्षा” जैसे विषयों पर प्रभावशाली और विचारपूर्ण भाषण दिए।
कार्यक्रम के संयोजक अल्हाज मौलाना इब्ने हसन अमलवी वाअज़, जो मजमअ उलेमा व वाएज़ीन पूर्वांचल के प्रमुख हैं, ने कार्यक्रम में 12 सूत्रीय स्वीकृत प्रस्ताव प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के सक्रिय कार्यकर्ता मौलाना काज़िम हुसैन मज़हरी, जो मदरसा हुसैनिया बड़ा गांव, घोसी के प्रबंधक हैं, ने सभी के प्रति आभार और धन्यवाद व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मौलाना नाज़िम अली वाअज़ खैराबादी, प्रमुख जामिया हैदरिया खैराबाद, ने की। मौलाना शफकत तकी कुम्मी ने कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी अच्छी तरह निभाई।
दोनों सत्रों की शुरुआत में मौलाना फैज़ असकरी ने पवित्र कुरआन की तिलावत की। मदरसा हुसैनिया के छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से धार्मिक तराना (तवाशीह) प्रस्तुत किया। मौलाना मुहम्मद वसीम कुम्मी ने मनकबत पढ़ी।
यह कार्यक्रम रात 9 बजे सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। इस अवसर पर पूर्वांचल क्षेत्र से लगभग ढाई सौ से अधिक उलेमा, वाएज़ीन, खतीब, ज़ाकिरीन और बुद्धिजीवियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के संबंध में सभी उलेमा, बुद्धिजीवियों और मेहमानों के स्वागत, ठहरने, भोजन और आतिथ्य आदि की सभी सेवाएं मदरसा हुसैनिया घोसी के शिक्षकों और छात्रों ने बहुत मेहनत, लगन, तत्परता और अच्छे ढंग से पूरी कीं।
इस अवसर पर मदरसा हुसैनिया घोसी की शानदार तीन मंजिला इमारत सुंदर सजावट और विद्युत रोशनी से जगमगा रही थी और पूरा परिसर प्रकाश से रोशन दिखाई दे रहा था।
अंत में कार्यक्रम के संयोजक मौलाना इब्ने हसन अमलवी वाइज़ ने 12 सूत्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किए, जिन्हें कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों ने सर्वसम्मति से मंजूर किया। मौलाना काज़िम हुसैन मज़हरी ने सभी उलेमा, बुद्धिजीवियों और मोमिनों का हृदय से धन्यवाद और आभार व्यक्त किया।
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