गुरुवार 3 सितंबर 2026 - 19:45
उपहार और सौगात के चयन से जीवनसाथी के चुनाव तक!

उस्ताद मोहसिन क़राअती ने एक शिक्षाप्रद घटना के माध्यम से बेकार और नष्ट हो जाने वाली वस्तुओं तथा उपयोगी चीज़ों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए जीवन में सही चुनाव की समझ पर चर्चा की है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उस्ताद मोहसिन क़राअती ने एक शिक्षाप्रद घटना के माध्यम से बेकार और नष्ट हो जाने वाली वस्तुओं तथा उपयोगी चीज़ों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए जीवन में सही चुनाव की समझ पर चर्चा की है।

उन्होंने मक्का मुकर्रमा से एक अनोखी सौगात खरीदने के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा, “जीवन में सभी साधनों के चयन में, चाहे वे सामाजिक और शैक्षिक मामलों से संबंधित हों, उनकी उपयोगिता और टिकाऊपन को ध्यान में रखना आवश्यक है।”

उन्होंने कहा कि एक बार मैं मक्का मुकर्रमा से वापस लौट रहा था। हवाई अड्डे पर किसी ने पूछा, “हाजी साहब! आपने क्या सौगात खरीदी है?” मैंने जवाब दिया, “पेचकस का एक डिब्बा।” यह ऐसा डिब्बा था जिसकी लंबाई और चौड़ाई लगभग एक-एक बालिश्त थी और उसमें विभिन्न प्रकार के पेचकस मौजूद थे। उस व्यक्ति ने कहा, “यह तो मक्का जाकर वापस लाया हुआ लोहा है। आप मक्का से इस्तेमाल किया हुआ लोहा लेकर आए हैं?”

मैंने जवाब दिया, “मैंने सोचा कि आखिर क्या चीज़ खरीदूं? जो भी खरीदूंगा, या तो खराब हो जाएगी, या सड़ जाएगी, या चोरी हो जाएगी या संभव है कि उसका गलत इस्तेमाल हो। लेकिन पेचकस ऐसा साधन है, जिससे बहुत से काम किए जा सकते हैं। यह रेगिस्तान, वीराने, शहर और गांव, हर जगह काम आता है। न यह सड़ता है और न ही आसानी से बेकार होता है।”

लोग मुझ पर हंसे, लेकिन बाद में जब वे मुझसे मिले तो उन्होंने कहा, “हाजी साहब! आप जो सौगात लाए थे, वह हमारे बहुत से काम आई। अल्लाह आपको इसका बेहतर बदला दे।”

उस्ताद क़राअती ने आगे कहा कि जब आप अपने चेहरे पर पानी डालते हैं और चेहरा धोते समय वुज़ू की नीयत भी कर लेते हैं, तो चेहरे को ठंडक मिलने के साथ वुज़ू भी हो जाता है और आपका यह कार्य बेहतर कार्य बन जाता है।

इसी तरह जब किसी को सलाम करें तो ऐसे व्यक्ति को सलाम करें जिसमें अधिक गुण और सम्मान हो। अगर किसी को कर्ज़ देना हो तो ऐसे व्यक्ति को कर्ज़ दें जिसकी जरूरत अधिक महत्वपूर्ण हो।

उन्होंने जीवनसाथी के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम अपने बच्चों के लिए दामाद या बहू का चुनाव करें तो हमारा ध्यान ऐसे जीवनसाथी के चयन पर होना चाहिए, जिनकी नस्ल से सलमान फ़ारसी और अबूज़र जैसे चरित्र वाले लोग पैदा हों। इस तरह हमारा कार्य भी एक बेहतर और श्रेष्ठ कार्य बन जाएगा।

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