हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हफ्त ए वहदत के मौके पर हिंदुस्तान के मशहूर खतीब हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना मेराज हैदर खान आज़मी से एक इंटरव्यू हुआ इस मौके पर उन्होंने कहां, इस ज़माने में फिरकापरस्ती, उम्मत ए मुस्लिमा के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।
विस्तृत इंटरव्यू इस तरह है:
हौज़ा न्यूज़ : मौलाना साहब सलामुन अलैकुम हमारा पहला सवाल, आज के दौर में सांप्रदायिकता और फिरकापरस्ती को उम्मत-ए-मुस्लिमा के लिए बड़ा खतरा क्यों माना जाता है?
मौलाना मेराज हैदर : आज फिरकापरस्ती उम्मत-ए-मुस्लिमा की एक बड़ी चुनौती है। विचारों और मतों में अंतर स्वाभाविक है, लेकिन जब यही अंतर नफरत, कट्टरता, एक-दूसरे को काफ़िर कहने और दुश्मनी में बदल जाती है, तो मुस्लिम समाज की एकता और ताकत कमज़ोर हो जाती है। दुश्मनों को हमेशा बाहर से हमला करने की ज़रूरत नहीं होती, बल्कि मुसलमानों के आपसी मतभेद भी उनकी कमज़ोरी बन सकती हैं।
हौज़ा न्यूज़ : क्या इस्लाम में मतभेद की कोई गुंजाइश है?
मौलाना मेराज हैदर : जी हाँ, इस्लाम में उलेमा व विद्वानों के बीच इल्मी और फिक़्ही मतभेद को स्वाभाविक माना गया है। समस्या मतभेद में नहीं, बल्कि मतभेद के नाम पर एक-दूसरे से नफरत करने में है। हमें अपने विचारों पर कायम रहते हुए दूसरे मुसलमानों के विचारों और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
हौज़ा न्यूज़ : कुरआन मुसलमानों की एकता के बारे में क्या मार्गदर्शन देता है?
मौलाना मेराज हैदर : कुरआन मुसलमानों को आपसी एकता और भाईचारे की शिक्षा देता है। अल्लाह तआला फरमाता है:
«وَلَا تَنَازَعُوا فَتَفْشَلُوا وَتَذْهَبَ رِيحُكُمْ»
यानी आपस में झगड़ा न करो, वरना तुम कमज़ोर पड़ जाओगे और तुम्हारी ताकत समाप्त हो जाएगी। यह आयत हमें बताती है कि आपसी संघर्ष से उम्मत की शक्ति कमज़ोर होती है।
हौज़ा न्यूज़ : फिरकापरस्ती को खत्म करने के लिए मुसलमानों को क्या कदम उठाने चाहिए?
मौलाना मेराज हैदर : सबसे पहले हमें अपने दिलों से धार्मिक और मसलकी कट्टरता को दूर करना होगा। अपने मत और मसलक पर कायम रहते हुए दूसरों के पवित्र विश्वासों और मुकद्दसात का सम्मान करना चाहिए। साथ ही कुरआन, पैगंबर-ए-इस्लाम स.ल.व. अहले-बैत और इस्लामी मूल्यों जैसी साझा बातों को आधार बनाकर एकता और भाईचारे को मज़बूत करना चाहिए।
हौज़ा न्यूज़ : क्या एकता के लिए अपने मसलक या विचारधारा को छोड़ना ज़रूरी है?
मौलाना मेराज हैदर : बिल्कुल नहीं। एकता का मतलब अपने मसलक से दूर होना नहीं, बल्कि मसलकी कट्टरता और पूर्वाग्रह को छोड़ना है। इंसान अपने धार्मिक विश्वास पर कायम रहते हुए भी दूसरे मुसलमानों का सम्मान कर सकता है। असली एकता यही है कि मतभेद के बावजूद हमारे बीच भाईचारा, सम्मान और सहयोग कायम रहे।
हौज़ा न्यूज़ : आज की युवा पीढ़ी को फिरकापरस्ती से बचाने के लिए आपका क्या संदेश है?
मौलाना मेराज हैदर : हमारी युवा पीढ़ी को चाहिए कि वह सोशल मीडिया की अफवाहों और भड़काऊ बातों से सावधान रहे, धार्मिक मामलों को प्रमाणित और विश्वसनीय विद्वानों से समझे तथा किसी भी समुदाय या मसलक के खिलाफ नफरत फैलाने से बचे। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है जो अपने विश्वास पर दृढ़ हो, लेकिन दूसरों के सम्मान को भी अपना धार्मिक और नैतिक कर्तव्य समझे। मतभेद के बावजूद सम्मान और विश्वास के साथ भाईचारायही मज़बूत उम्मत की पहचान है।
हौज़ा न्यूज़ : बहुत-बहुत शुक्रिया आपके विचारों से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। अल्लाह आपको सलामत रखे
आपकी टिप्पणी