हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने क़ुम में मजमए तालीमी व पजूहशी अइम्मा-ए-अतहार के नए शैक्षणिक वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इंसान को अपने जीवन में लगातार विकास और आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए। यदि इंसान के दो दिन एक जैसे हों और उसके जीवन में कोई सकारात्मक बदलाव न आए, तो वह घाटे में है।
उन्होंने कहा कि इंसान आर्थिक नुकसान की भरपाई कर सकता है, लेकिन बीता हुआ समय वापस नहीं लाया जा सकता। इसलिए विद्यार्थियों और फुज़ला को अपने शैक्षणिक जीवन के हर पल का भरपूर लाभ उठाना चाहिए।
आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह देश की रक्षा के लिए रक्षात्मक प्रयास जारी रखना आवश्यक है, उसी तरह शैक्षणिक, वैचारिक और शोध संबंधी प्रयास भी किसी भी स्थिति में नहीं रुकने चाहिए। दुश्मन सैन्य और राजनीतिक साधनों के साथ-साथ वैचारिक स्तर पर भी इस्लाम, शिया धर्म, फ़िक़्ह, हौज़ा इल्मिया और धार्मिक मूल्यों के खिलाफ संदेह और शंकाएँ पैदा कर रहा है। हौज़ा इल्मिया को मजबूत शैक्षणिक और शोध की बुनियाद के माध्यम से इन शंकाओं और समाज की वैचारिक आवश्यकताओं का जवाब देना चाहिए।
उन्होंने मजमए तालीमी व पजूहशी अइम्मा-ए-अतहार की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्था ने हौज़ा की पारंपरिक शिक्षाओं को आज के समाज की नई आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास किया है। फ़िक़्ह, उसूल और तफ़्सीर के साथ-साथ नए चिकित्सकीय, सामाजिक और शासन संबंधी मुद्दों पर भी शैक्षणिक बैठकों का आयोजन सराहनीय है।
क़ुम के हौज़ा इल्मिया के शिक्षक संघ के प्रमुख ने शेख अंसारी की शैक्षणिक सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने दौर की समस्याओं को गहरी विद्वतापूर्ण समझ और इज्तिहादी तरीके से हल किया और फ़िक़्ह तथा उसूल में ऐसी महत्वपूर्ण रचनाएँ छोड़ीं, जिनका आज भी विद्वतापूर्ण जगत में विशेष महत्व है। आज भी हमें ऐसे शेख अंसारियों की आवश्यकता है, जो आधुनिक सामाजिक, आर्थिक, चिकित्सकीय, वैज्ञानिक और शासन संबंधी समस्याओं का फ़िक़्ही और इज्तिहादी आधार पर अध्ययन कर सकें।
उन्होंने हौज़ा की शैक्षणिक पहचान को बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि हौज़ा को दूसरों की पसंद के अनुसार अपने मूल मूल्यों में बदलाव नहीं करना चाहिए। हालांकि पुराने विद्वानों की इज्तिहादी पद्धति को कायम रखते हुए नई समस्याओं का शैक्षणिक और विद्वतापूर्ण जवाब जरूर देना चाहिए।
आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने विद्यार्थियों को नसीहत करते हुए कहा कि वे शिक्षा के अवसरों को महत्वपूर्ण समझें और शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों तथा उपलब्ध संसाधनों से भरपूर लाभ उठाकर अपनी शैक्षणिक और आध्यात्मिक क्षमताओं को बढ़ाएँ।
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