हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सुन्नी धर्मशास्त्र विभाग में “अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की शैक्षिक और सांस्कृतिक परंपराएं” विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद राशिद इस्लाही ने की।

इस अवसर पर प्रोफेसर इस्लाही ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि सम्मान मानव जीवन का मूल अधिकार है। देश का हर नागरिक सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीना चाहता है और सम्मान प्राप्त करने का एकमात्र साधन ज्ञान है। ज्ञान के बिना मनुष्य अज्ञानता के अंधेरे में भटकता रहता है, जिसके परिणामस्वरूप अशांति और अव्यवस्था पैदा होती है, जो शांति और सुरक्षा के पूरी तरह विपरीत है।
उन्होंने आगे कहा कि सर सैयद ने इस यूनिवर्सिटी की स्थापना इसलिए की थी, ताकि पूरी कौम अशिक्षा के दलदल से बाहर निकल सके, प्रचलित शिक्षा व्यवस्था को व्यावहारिक रूप से अपने जीवन में लागू कर सके और देश की आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे सके।

कार्यक्रम की विशेष अतिथि अंग्रेजी विभाग की प्रसिद्ध शिक्षिका और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एमआईसी जनसंपर्क विभाग की प्रोफेसर वैभा शर्मा ने कहा कि हम सभी इस यूनिवर्सिटी का सम्मान करते हैं और इस संस्थान से जुड़े अन्य लोग भी इसकी प्रतिष्ठा और महत्व को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। लेकिन आप, धर्मशास्त्र विभाग के छात्रों के रूप में, इस बात के सबसे पहले जिम्मेदार हैं कि समय के महत्व को समझते हुए स्वयं को बेहतर बनाएं और अपनी क्षमताओं को इतना विकसित करें कि एक दिन यूनिवर्सिटी को स्वयं यह कहना पड़े कि हमें आप पर गर्व है।

उन्होंने छात्रों से कहा कि वे खुद को केवल अपने विभाग तक सीमित न रखें। विभाग के बाहर भी एक पूरी दुनिया मौजूद है, जो आपकी बात सुनने और आपको समझने के लिए उत्सुक है और आपका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ी है।

दूसरे अतिथि वक्ता और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय के डीन प्रोफेसर आफताब आलम ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आप भारत के ऐसी यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिसका उल्लेख भारतीय संविधान में भी मिलता है। इससे इस संस्थान की प्रतिष्ठा और महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस शिक्षण संस्थान के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने यहां शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के प्रशिक्षण और व्यक्तित्व निर्माण की भी पूरी व्यवस्था की थी। छात्रों के लिए आवास की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, ताकि वे विभिन्न धर्मों और अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले छात्रों के बीच रहकर सकारात्मक तरीके से विचार-विमर्श और संवाद कर सकें, बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें और इन बातों को व्यावहारिक रूप से अपने जीवन में लागू कर सकें।

उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में जब लोगों का किताबों से संबंध लगातार कम होता जा रहा है, ऐसे समय में आपको किताबों के साथ अपना रिश्ता और मजबूत करना चाहिए। यकीन मानिए, किताब से बड़ा कोई साथी नहीं है। जो व्यक्ति किताबों से दोस्ती करता है, वह कभी अवसाद का शिकार नहीं हो सकता।
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