बुधवार 22 जुलाई 2026 - 12:12
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग में "कर्बला: मानवता और नैतिक शिक्षाओं की पाठशाला" विषय पर संगोष्ठी आयोजित

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग की ओर से "कर्बला: मानवता और नैतिक शिक्षाओं की पाठशाला" विषय पर एक गरिमामय एवं विद्वत्तापूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें प्राध्यापकों, शोधार्थियों, इमाम-ए-जमाअत, छात्रों तथा बड़ी संख्या में मोमिनीन ने भाग लिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शिया धर्मशास्त्र विभाग के तत्वावधान में "कर्बला: मानवता और नैतिक शिक्षाओं की पाठशाला" विषय पर एक गरिमामय एवं शैक्षणिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्राध्यापकों, शोधार्थियों, इमाम-ए-जमाअत, छात्रों और बड़ी संख्या में मोमिनीन ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना अहमद मजलिसी द्वारा पवित्र क़ुरआन के भावपूर्ण तिलावत से हुई। इसके बाद शिया धर्मशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. मौलाना असगर एजाज़ क़ायमी ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कर्बला की घटना को मानवता, नैतिकता, न्याय, त्याग और सत्य पर अडिग रहने का शाश्वत घोषणापत्र बताया। उन्होंने कहा कि कर्बला हर युग के इंसान को अत्याचार के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े होने और उच्च मानवीय मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देती है।

इस शैक्षणिक संगोष्ठी के मुख्य अतिथि ईरान से पधारे हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैय्यद मुबीन हैदर रिज़वी थे। उन्होंने अपने व्यापक और विचारोत्तेजक व्याख्यान में धार्मिक शिक्षा और आधुनिक शिक्षा के परस्पर संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान युग की आवश्यकताओं को समझने के लिए धार्मिक समझ के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान से सुसज्जित होना भी अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि मानवता, नैतिकता, ज्ञान, चरित्र और सामाजिक उत्तरदायित्व की ऐसी शाश्वत पाठशाला है, जो हर युग के मनुष्य को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने का संदेश देती है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मौलाना अब्बास रज़ा ने अत्यंत प्रभावशाली और गरिमापूर्ण ढंग से किया। उन्होंने विषय के अनुरूप एक तर्कपूर्ण, विस्तृत और विद्वत्तापूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए कर्बला के नैतिक, वैचारिक और सभ्यतागत पहलुओं को उजागर किया तथा उपस्थित लोगों को उसके व्यावहारिक संदेश से परिचित कराया।

इस संगोष्ठी में शोधार्थियों, इमाम-ए-जमाअत, प्राध्यापकों, छात्रों और मोमिनीन ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया तथा वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत विचारों और शैक्षणिक बिंदुओं की भरपूर सराहना की।

कार्यक्रम के अंत में मौलाना ज़ाहिद हुसैन ने सभी सम्मानित अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजकों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा जताई कि इस प्रकार की शैक्षणिक और वैचारिक संगोष्ठियाँ भविष्य में भी आयोजित होती रहेंगी, ताकि कर्बला का मानवता, नैतिकता, सत्य और न्याय का सार्वभौमिक संदेश समाज में और अधिक व्यापक रूप से फैलाया जा सके।

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