लेखकः सय्यद साजिद हुसैन रज़वी
हौज़ा न्यूज़ एजेंसी! ज़िंदगी की कांटों भरी राहों पर चलते हुए इंसान अक्सर तन्हाई और थकान का शिकार हो जाता है। इस लंबे सफ़र में हम बहुत से दोस्त बनाते हैं, और बेशक कई दोस्त खुशी और ग़म में हमारा साथ भी देते हैं। लेकिन सच तो ये है कि ज़िंदगी के कुछ मोड़ ऐसे होते हैं जहाँ दुनिया की चमक-दमक फीकी पड़ जाती है, आज़माइशें सिर उठाती हैं, और वक्त का पहिया ऐसा घूमता है कि वे दोस्त जो कभी साया बनकर साथ थे, वे या तो हालात की धूल में कहीं खो जाते हैं, या अपनी मजबूरियों के बोझ तले दबकर खामोश हो जाते हैं।
जब दोस्तों के वादे रेत की दीवार की तरह ढहने लगें और दुनिया के सारे दरवाज़े बंद महसूस हों, तब सिर्फ एक ही दीवार है जो कभी नहीं गिरती, और वो है भाई का वजूद। यह वह रिश्ता है जो किसी स्वार्थ का मोहताज नहीं होता। जैसा कि मौला-ए-कायनात हज़रत अली (अलैहिस्सलाम) ने फरमाया: عَلَيْكَ بِإِخْوَانِ الصِّدْقِ... فَإِنَّهُمْ جُنَّةٌ عِنْدَ الْبَلَاءِ
(सच्चे भाई मुसीबत के वक्त एक ऐसी ढाल हैं जो कभी नहीं टूटती)। भाई वह नहीं जो सिर्फ खुशी में साथ हो, बल्कि भाई वह है जो उस वक्त काम आए जब दुनिया के सारे सहारे साथ छोड़ जाएं।
क़ुरआन-ए-पाक में हज़रत मूसा (अ.स.) की दुआ इस हक़ीक़त की सबसे बड़ी गवाही है कि जब उन्होंने अल्लाह से मदद मांगी तो उन्होंने किसी दोस्त या क़ौम का चुनाव नहीं किया, बल्कि अपने भाई हारून (अ.स.) को पुकारा, क्योंकि वे जानते थे कि भाई ही वह बाज़ू है जो कभी नहीं थकता। दो भाइयों की मिसाल उन दो हाथों जैसी है जो एक-दूसरे को धोकर पाक-साफ़ करते हैं; दोस्त शायद आपकी ग़लतियों पर आपसे मुंह मोड़ लें, लेकिन भाई आपकी ग़लतियों को छुपाता भी है और उन्हें सुधार कर आपको निखारता भी है।
जिसके पास ऐसा भाई है, उसे तन्हाई का डर कभी नहीं होना चाहिए, क्योंकि दुनिया के दोस्त बदल सकते हैं, मगर भाई का खूनी और रूहानी रिश्ता कभी नहीं बदलता।
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