हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम हसन मुस्लेह ने बुधवार शाम हफ्ता-ए-दिफ़ा-ए-मुक़द्दस के अवसर पर दाश्तिस्तान में हज़रत जवादुलअइम्मा (अ.स.) के नाम से गठित सुपाह के कमांडर, अधिकारियों, पासदारों और जिहाद व शहादत के क्षेत्र के पूर्व सैनिकों से मुलाकात की।
उन्होंने सूरह अल-माइदा की आयत 54 की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह आयत मौजूदा दौर में ईरानी जनता की भूमिका को स्पष्ट करती है। उन्होंने कहा कि अल्लाह तआला ने इस्लाम के मददगारों की जिन विशेषताओं का उल्लेख किया है अल्लाह से प्रेम, मोमिनों के प्रति विनम्रता, काफ़िरों के सामने दृढ़ता और मलामत करने वालों की निंदा से न डरना आज ईरान की प्रतिरोधी जनता और प्रतिरोध के मोर्चे में दिखाई देती हैं।
उन्होंने मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए हर स्तर पर पूरी तैयारी बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि इस्लामी व्यवस्था के दुश्मन पूरी ताकत के साथ देश के विश्वासों और स्वतंत्रता के खिलाफ एक व्यापक और हाइब्रिड युद्ध चला रहे हैं। हालांकि, सुपाह और बसीज अपनी जिहादी भावना और अल्लाह पर भरोसे के सहारे दुश्मनों की साजिशों के सामने एक मजबूत दीवार बने हुए हैं और आगे भी रहेंगे।
इमाम-ए-जुमआ ने आठ साल के पवित्र रक्षा काल के योद्धाओं, युद्ध के घायलों और पूर्व युद्धबंदियों के बलिदानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जिहाद के क्षेत्र के वरिष्ठ और पूर्व योद्धा «يُجَاهِدُونَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ» के स्पष्ट उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा कि जिहाद के क्षेत्र के पूर्व योद्धाओं का सम्मान करना इस्लामी क्रांति के मूल मूल्यों का सम्मान करना है। उनके अनुभव और बलिदान की भावना को नई पीढ़ी तक एक मूल्यवान विरासत के रूप में पहुंचाया जाना चाहिए।
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