गुरुवार 24 सितंबर 2026 - 23:33
ईरान दबाव के सामने नही झुकेगा, वार्ता का दरवाज़ा खुला है

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान युद्ध, धमकी और दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है, हालांकि मतभेदों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता खुला है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, रक्षा क्षमता, ग़ज़ा, होर्मुज़ और क्षेत्रीय सुरक्षा को अपने संबोधन के प्रमुख विषयों में शामिल किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पिज़िश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान युद्ध, धमकी और दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है, लेकिन मतभेदों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता खुला है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, रक्षा क्षमता, ग़ज़ा, होर्मुज़ और क्षेत्रीय सुरक्षा को अपने संबोधन के प्रमुख विषय बताया।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए मसूद पिज़िश्कियान ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव की पृष्ठभूमि में तेहरान का रुख प्रस्तुत किया। उनका यह संबोधन ऐसे समय में हुआ, जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी महासभा को संबोधित करते हुए ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था।

पिज़िश्कियान ने अपने संबोधन की शुरुआत ईरान में हालिया हमलों में मारे गए लोगों की तस्वीरें दिखाकर की और कहा कि ईरान आतंकवादी नहीं, बल्कि आतंकवाद का शिकार है। उन्होंने ईरानी नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान ने युद्ध शुरू नहीं किया, बल्कि अपने बचाव के अधिकार का इस्तेमाल किया है।

ईरानी राष्ट्रपति ने रक्षा क्षमता के बारे में कहा कि ईरान अपने बचाव के लिए किसी से अनुमति नहीं लेगा। उनके अनुसार, ईरान की रक्षा शक्ति का उद्देश्य युद्ध शुरू करना नहीं, बल्कि किसी भी देश को ईरान पर हमला करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि युद्ध का दायरा बढ़ाने से क्षेत्र में सुरक्षा स्थापित नहीं होगी।

पिज़िश्कियान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में स्पष्ट किया कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल नहीं करना चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक और उससे संबंधित ज्ञान से वंचित होना भी स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि परमाणु तकनीक ईरान के लिए चिकित्सा, कृषि, उद्योग और ऊर्जा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विकास का साधन है।

उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि परमाणु ज्ञान को कुछ देशों तक सीमित रखा जाए। उनके अनुसार, ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के बारे में विश्वसनीय गारंटी देने के लिए समझौते पर बातचीत कर सकता है, लेकिन इसके मूल अधिकार भी सुरक्षित रहने चाहिए।

ग़ज़ा और फ़िलिस्तीन का मुद्दा

ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में ग़ज़ा और फ़िलिस्तीन की स्थिति को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया। उन्होंने फ़िलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ज़मीर पर एक खुला घाव बताते हुए कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता के अधिकारों और उनके खिलाफ जारी अत्याचारों की अनदेखी करके क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा केवल क्षेत्रीय मामला नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रदर्शन और वैश्विक न्याय व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।

हुर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का रुख

पिज़िश्कियान ने हुर्मुज़ स्ट्रेट का भी उल्लेख किया और कहा कि ईरान यह स्वीकार नहीं कर सकता कि कुछ देश इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से लाभ उठाएं और इसी मार्ग का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ दबाव और कार्रवाई के लिए भी करें।

उन्होंने कहा कि ईरान को नज़रअंदाज़ करके फ़ारस की खाड़ी और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। ईरान के राष्ट्रपति ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि क्षेत्रीय देशों को एक-दूसरे को सुरक्षा के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखने के बजाय साझा सुरक्षा के लिए सहयोग करना चाहिए।

दबाव के सामने झुकने से इनकार, कूटनीति के लिए तत्परता

पिज़िश्कियान ने एक ओर स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिकी दबाव, प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के सामने झुकने वाला नहीं है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने बातचीत और कूटनीति के लिए अपनी तत्परता भी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत, वार्ता और कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन ताकत और धमकी की भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार, युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि ऐसे समझौते के माध्यम से तलाश किया जाना चाहिए, जिसमें ईरान की सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी हो।

ईरानी राष्ट्रपति ने क्षेत्र के भविष्य के बारे में कहा कि सुरक्षा किसी एक देश के लिए अलग से हासिल नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, या तो क्षेत्र के देश मिलकर सुरक्षा स्थापित करेंगे या फिर सभी को असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा।

पिज़िश्कियान के संबोधन में कुल मिलाकर ईरान की ओर से अपनी रक्षा क्षमता, शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा के अधिकार पर ज़ोर दिया गया। साथ ही बातचीत और कूटनीति का रास्ता खुला रखने का संदेश भी दिया गया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि ईरान के साथ संबंधों और क्षेत्रीय समस्याओं को धमकी और दबाव के बजाय बातचीत और आपसी सम्मान के माध्यम से हल करने का प्रयास किया जाए।

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