हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरानी राष्ट्रपति मसूद पिज़ेशकियान एक महान व्यक्ति हैं। एक ओर वे व्यक्तिगत रूप से बेहद विनम्र और शिक्षित इंसान हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति के रूप में उनका प्रदर्शन भी बेहतरीन रहा है। युद्ध और कड़े प्रतिबंधों के बावजूद जिस तरह उन्होंने देश को चलाया है, वह प्रशंसा के योग्य है। सर्वोच्च नेता ने भी उनके कार्यों की सराहना की है। वरना इतने गंभीर युद्ध और हमलों के बाद अक्सर देशों की आर्थिक स्थिति विनाशकारी हो जाती है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनका कल का भाषण बेहतरीन था और उन्होंने ईरान का पक्ष प्रभावी ढंग से पेश किया। विशेष रूप से उनका यह वाक्य उल्लेखनीय है:
हम अपने बचाव के लिए युद्ध से नहीं डरते और शांति के लिए बातचीत से नहीं भागते।
उन्होंने काले रंग के कपड़े पहन रखे थे, जो शिया परंपरा और विशेष रूप से ईरानी संस्कृति में शोक और दुख का प्रतीक माना जाता है। एक हाथ में शहीद सर्वोच्च नेता की तस्वीर लेकर उन्होंने कहा कि मैं उस ईरान से आया हूं, जिसके नेता और अन्य वरिष्ठ नेताओं की हत्या कर दी गई।
उन्होंने मिनाब की शहीद बच्चियों तथा अन्य ज़ायोनी और औपनिवेशिक आक्रमणों की तस्वीरें भी दिखाईं और कहा कि इससे साबित होता है कि असली आतंकवादी अमेरिका और इज़राइल हैं।
दूसरी ओर, लेखक ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण का उल्लेख करते हुए उसकी आलोचना की है। लेख के अनुसार, उनका भाषण किसी भी निष्पक्ष व्यक्ति के लिए शर्मिंदगी और अमेरिका के जागरूक नागरिकों के लिए पछतावे का कारण था। इसी आधार पर लेख में कहा गया है कि “संयुक्त राष्ट्र में भी ईरान ने अमेरिका को हरा दिया।
पिज़ेशकियान के भाषण के प्रमुख बिंदु:
उन्होंने कहा,आतंकवादी और आतंक को बढ़ावा देने वाले हमें आतंकवादी कहते हैं, जबकि हमने केवल अपना बचाव किया है। वे दावा करते हैं कि ईरान अस्थिरता का कारण है। क्या हम, जो स्वतंत्र रूप से जीना चाहते हैं और किसी के सामने सिर नहीं झुकाना चाहते, अस्थिरता का कारण हैं? और जो आतंकवाद, हत्या और अपराध करते हैं, क्या वे शांति और सुरक्षा के समर्थक हैं?
ग़ाज़ा में इज़राइली कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में स्थायी शांति फ़िलिस्तीन को न्याय मिले बिना संभव नहीं है।
उन्होंने परमाणु हथियारों के मुद्दे पर कहा कि इस क्षेत्र में परमाणु बम और अन्य विनाशकारी हथियार इज़राइल के पास हैं, लेकिन निरीक्षण की मांग ईरान से की जाती है। उन्होंने ग़ज़ा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान को बातचीत की मेज पर भी बमबारी का निशाना बनाया गया।
उन्होंने आगे कहा कि इज़राइल के पास परमाणु हथियार हैं और वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य नहीं है, फिर भी उसे अरबों डॉलर के हथियार दिए जाते हैं और उसे दूसरे देशों पर हमला करने की छूट हासिल है।
पिज़ेशकियान ने कहा,धमकियां हमारी राष्ट्र को और अधिक एकजुट और शक्तिशाली बनाती हैं तथा ईरानियों के प्रतिरोध को और मजबूत करती हैं। ईरानी राष्ट्र जबरदस्ती के सामने सिर नहीं झुकाएगा और हमलावरों को पछताने पर मजबूर करेगा। हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि हम जबरदस्ती की भाषा को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगे।
लेखक के अनुसार, पिज़ेशकियान ने अपने भाषण के माध्यम से ईरान और औपनिवेशिक आक्रमण से प्रभावित राष्ट्रों का प्रभावी प्रतिनिधित्व किया। लेख में दावा किया गया है कि उनके भाषण की दुनिया भर में सराहना की जा रही है।
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