गुरुवार 15 अक्टूबर 2026 - 19:10
नर्सें हज़रत ज़ैनब स.ल.के त्याग और बलिदान के रास्ते पर चल रही हैं।आयतुल्लाह आराफी

हौज़ा / ईरान के प्रमुख धार्मिक शिक्षण संस्थानों हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने नर्सिंग दिवस के अवसर पर नर्सों की दिन-रात की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा केवल कर्बला में बीमारों की देखभाल करने वाली महान हस्ती ही नहीं थीं, बल्कि इतिहास के सबसे कठिन दौर में सब्र और दृढ़ता की मिसाल भी थीं। आज नर्सें भी उसी त्याग और बलिदान के रास्ते पर चल रही हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरान के हौज़ा-ए-इल्मिया के प्रमुख आयतुल्लाह अली रज़ा आराफी ने हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के शुभ जन्मदिवस और नर्सिंग दिवस के अवसर पर अपने संदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी नर्सों की निःस्वार्थ सेवाओं की सराहना की और उन्हें बधाई दी।

अपने संदेश में उन्होंने सूरह माएदा की आयत 32 का उल्लेख करते हुए कहा कि जो व्यक्ति किसी एक इंसान की जान बचाता है, मानो उसने पूरी मानवता की जान बचाई।

आयतुल्लाह आराफी ने नर्सों को संबोधित करते हुए कहा कि आप अपनी सेवाओं के माध्यम से हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के सब्र और धैर्य को अल्लाह के बंदों की सेवा के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं। हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के शुभ जन्मदिवस को नर्सिंग दिवस के रूप में मनाया जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि मरीजों की शारीरिक देखभाल और उच्च मानवीय मूल्यों पर दृढ़ रहने के बीच गहरा संबंध है।

उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा न केवल कर्बला में घायलों और बीमारों की देखभाल करने वाली महान हस्ती थीं, बल्कि इतिहास के सबसे कठिन क्षणों में सब्र, दृढ़ता और अटल संकल्प की प्रतीक भी थीं। आज नर्सें त्याग, बलिदान और मानवता की सेवा के उसी मार्ग पर चल रही हैं।

आयतुल्लाह आराफी ने आगे कहा कि हौज़ा-ए-इल्मिया नर्सों की दिन-रात की अथक मेहनत और उनकी निःस्वार्थ सेवाओं को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। नर्सिंग दिवस उन सभी लोगों के प्रयासों को सराहने का बेहतरीन अवसर है, जो चिकित्सा के क्षेत्र में प्रेम और ईमान के साथ मरीजों के दर्द को कम करते हैं और समाज में उम्मीद की रोशनी फैलाते हैं।

उन्होंने कहा कि नर्सें केवल मरीजों को शारीरिक राहत पहुंचाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अपने सहानुभूतिपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार, पवित्र चरित्र तथा मरीजों की इज्जत और गरिमा का ख्याल रखकर इस्लामी नैतिक शिक्षाओं की व्यावहारिक मिसाल भी पेश करती हैं। उनकी निष्ठापूर्ण सेवा अल्लाह की बारगाह में एक महान इबादत और सराहनीय संघर्ष है, जिसका सवाब सुरक्षित है।

अपने संदेश के अंत में आयतुल्लाह आराफी ने सभी कर्तव्यनिष्ठ और मेहनती नर्सों को बधाई दी तथा उनकी सेहत, सफलता और अधिक से अधिक नेक काम करने की तौफीक के लिए दुआ की। उन्होंने हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा के वसीले से इंसानियत की सेवा के रास्ते पर दृढ़ रहने की तौफीक मांगी।उन्होंने उम्मीद जताई कि अल्लाह तआला की रहमतें हमेशा नर्सों और उनके परिवारों पर बनी रहें।

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