रविवार 25 अक्टूबर 2026 - 20:56
दुश्मन सैन्य युद्ध के साथ-साथ जनता का मनोबल भी कमजोर करना चाहता हैः हुज्जतुल इस्लाम हुसैनी नियाज़

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम हुसैनी नियाज़ ने कहा कि दुश्मन सैन्य युद्ध के साथ-साथ जनता का मनोबल कमजोर करने और समाज में निराशा फैलाने की भी कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकता बनाए रखना, सामाजिक उम्मीद को मजबूत करना और दुश्मन के मनोवैज्ञानिक एवं मीडिया अभियानों के प्रति सतर्क रहना उसकी साजिशों का मुकाबला करने के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम हुसैनी नियाज़ ने कहा कि दुश्मन के मनोवैज्ञानिक और मीडिया अभियानों के प्रति सतर्क रहना बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सहनशीलता को मजबूत करना देश के संवेदनशील हालात से बाहर निकलने के प्रमुख उपाय हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मन सैन्य योजनाओं के साथ-साथ लोगों को मानसिक रूप से झटका देने, निराशा फैलाने और उनका मनोबल कमजोर करने की भी योजना बना रहा है।

उन्होंने सैन्य तनाव और संघर्ष बढ़ने की आशंका का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि संघर्ष शुरू होता है, तो दुश्मन केवल सैन्य साधनों पर निर्भर नहीं रहेगा। वह सोशल मीडिया और दूसरे संचार माध्यमों का इस्तेमाल करके जनमत को प्रभावित करने तथा समाज में यह धारणा पैदा करने की कोशिश करेगा कि परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं और भविष्य के लिए कोई उम्मीद नहीं बची है।

हुज्जतुल इस्लाम हुसैनी नियाज़ ने कहा कि इस तरह के प्रचार का उद्देश्य आम जनता का मनोबल गिराना और राष्ट्रीय स्तर पर मुश्किलों का सामना करने की क्षमता को कमजोर करना है। दुश्मन के मनोवैज्ञानिक अभियानों के तरीकों को समझने से लोग अफवाहों और मीडिया में फैलाए जाने वाले भावनात्मक प्रचार से प्रभावित होने से बच सकते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी शांति बनाए रखते हुए सही निर्णय लेना और अपनी जिम्मेदारियां निभाना जरूरी है।

उन्होंने राष्ट्रीय एकता को वर्तमान परिस्थितियों की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में से एक बताते हुए कहा कि हाल के अनुभवों से पता चलता है कि लोगों ने कई संवेदनशील मौकों पर परिस्थितियों को समझते हुए जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाई है। इस एकजुटता को बनाए रखने से समस्याओं का सामना करने और बाहरी दबावों का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है।

हुज्जतुल इस्लाम हुसैनी नियाज़ ने धार्मिक शिक्षाओं में ईश्वरीय सहायता की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, ईमान, साहस, धैर्य और अपने कर्तव्यों का पालन कठिनाइयों का सामना करने के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए समाज को भय और निराशा में घिरने के बजाय सतर्कता और एकजुटता के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।

उन्होंने मीडिया में गलत खबरों और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने की आलोचना करते हुए समाचारों की सावधानीपूर्वक जांच करने और अपुष्ट खबरों को आगे प्रसारित करने से बचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक युद्ध का मुकाबला करने के लिए मीडिया साक्षरता बढ़ाना, अफवाहें फैलाने के तरीकों को समझना और विश्वसनीय समाचार स्रोतों पर भरोसा करना आवश्यक है।

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