रविवार 25 अक्टूबर 2026 - 22:25
आयतुल्लाहिल उज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी के नेतृत्व में जुलूस मे मोमेनीन ने की शिरकत

 हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी (दाम जिल्लोहुल वाऱीफ) ने अज़ा ए फ़ातेमिया के महत्व पर कहा कि ऐसे आयोजन पैगंबर (स अ व आ व) के परिवार (अस) के प्रति निष्ठा दोहराने और हक़ीक़ी इस्लामे मोहम्मदी से जुड़े रहने का माध्यम है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी (दाम जिल्लोहुल वाऱीफ) ने 13 जमादिउल अव्वल को हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अस) की शहादत की याद में वार्षिक जुलूसे अज़ा ए फ़ातेमिया का नेतृत्व किया। यह जुलूस नजफ़ अशरफ़ स्थित केंद्रीय कार्यालय से शुरू होकर हज़रत अमीरुल मोमेनीन अली (अस) के हरमे मुबारक तक पहुँचा। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, यह दिन हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अस) की शहादत की दूसरी प्रचलित तिथि के अनुसार मनाया जाता है।
इस शोक जुलूस में प्रमुख धार्मिक विद्वानों, इस्लामी धर्मगुरुओं, शिक्षकों और धार्मिक शिक्षा केंद्रों के विद्यार्थियों के साथ-साथ कई इस्लामी देशों से आए श्रद्धालुओं, इराक़ के विभिन्न प्रांतों के लोगों, क़बीलाई प्रमुखों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर शोकपूर्ण वातावरण में सभी ने हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अस) की दर्दनाक शहादत को याद किया और पैगंबर मुहम्मद (स अ व आ व) के परिवार के प्रति अपने प्रेम, निष्ठा और समर्पण को दोहराया।
 हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा हाफ़िज़ बशीर हुसैन नजफ़ी (दाम जिल्लोहुल वाऱीफ) ने अज़ा ए फ़ातेमिया के महत्व पर कहा कि ऐसे आयोजन पैगंबर (स अ व आ व) के परिवार (अस) के प्रति निष्ठा दोहराने और हक़ीक़ी इस्लामे मोहम्मदी से जुड़े रहने का माध्यम है।
दूसरी ओर, उनके पुत्र और केंद्रीय कार्यालय के निदेशक, शेख़ अली नजफ़ी साहब ने अपने बयान में कहा कि यह जुलूस अत्याचार, अन्याय और आतंकवाद के प्रति विरोध प्रकट करने, सत्य और न्याय के मार्ग पर दृढ़ता से डटे रहने तथा हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अस) पर किए गए अत्याचारों की याद ताज़ा करने का प्रतीक है।

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