मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 - 19:13
जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा: मौलाना महबूब मेहदी आबिदी

जन्नतुल बक़ी में इमामों और अन्य पवित्र हस्तियों की मज़ारों के पुनर्निर्माण की मांग दोहराते हुए उलमा ने इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आंदोलन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। अमेरिका के शिकागो स्थित अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ताओं ने निर्माण-ए-बक़ी को धार्मिक और ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी बताते हुए उम्मीद जताई कि इंशाअल्लाह, एक दिन वहां भव्य रौज़े का निर्माण होगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शहादत के अवसर पर अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन, शिकागो, अमेरिका की ओर से ज़ूम के माध्यम से एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ धर्मगुरु मौलाना सैयद एहतिशाम अब्बास ज़ैदी ने की।

सम्मेलन की शुरुआत में अल-बक़ी ऑर्गनाइज़ेशन के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन महबूब मेहदी आबिदी नजफ़ी ने कार्यक्रम की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें एक बार फिर यह संकल्प लेना चाहिए कि जब तक जन्नतुल बक़ी में रौज़ों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बक़ी में ध्वस्त की गई कब्रें वहां दफ़न पवित्र हस्तियों की मज़लूमीयत की गवाही दे रही हैं।

महाराष्ट्र के पुणे शहर से मौलाना असलम रिज़वी ने कहा कि कुछ लोग यह सवाल करते हैं कि जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण के लिए चलाए जा रहे आंदोलन में सफलता की कितनी संभावना है। इसका जवाब बिल्कुल स्पष्ट है। हमें अपने कर्तव्य और ज़िम्मेदारी को समझते हुए उस पर अमल करना चाहिए। परिणाम हमारे हाथ में नहीं है।

नगरम शहर के सक्रिय और क्रांतिकारी धर्मगुरु मौलाना सैयद अब्बास बाक़री ने अपने संबोधन में कहा कि जन्नतुल बक़ी के आंदोलन से जुड़े लोग क़यामत के दिन जब मासूम इमामों अलैहिमुस्सलाम की पवित्र बारगाह में पहुंचेंगे, तो यह कह सकेंगे कि वे दुनिया में उन लोगों के साथ थे जिन्होंने जन्नतुल बक़ी के पुनर्निर्माण के आंदोलन में हिस्सा लिया था।

भारत के प्रमुख धर्मगुरु और शोधकर्ता मौलाना सैयद एहतिशाम अब्बास ज़ैदी ने अपने प्रभावशाली संबोधन में पूरी दुनिया के मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग समझते हैं कि बड़ी ताकतें जन्नतुल बक़ी का पुनर्निर्माण नहीं होने देंगी, जबकि वास्तविकता यह है कि जिन्हें वे बड़ी ताकतें समझते हैं, उनकी अपनी कोई ताकत नहीं है। “ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह” का अर्थ यही है कि वास्तविक शक्ति केवल अल्लाह के पास है। हमें विश्वास है कि इंशाअल्लाह, जन्नतुल बक़ी में जल्द ही एक सुंदर रौज़े का निर्माण होगा।

मुंबई से वरिष्ठ धर्मगुरु मौलाना सैयद शेर मोहम्मद जाफ़री ने अपने विस्तृत और प्रभावशाली संबोधन में कहा कि सरकार से हमारी केवल इतनी मांग है कि हमें जन्नतुल बक़ी में रौज़े के निर्माण की अनुमति दी जाए। हमें सरकार के धन की भी आवश्यकता नहीं है। पूरी दुनिया में अहले बैत अलैहिमुस्सलाम से प्रेम करने वाले लोग अपनी पाक कमाई से रौज़े का निर्माण कर सकते हैं।

ईरान के पवित्र शहर क़ुम से वरिष्ठ धर्मगुरु मौलाना सैयद इरफ़ान मेहदी ज़ैदी ने अपने संबोधन में कहा कि बक़ी की धरती आज भी आले सऊद के अत्याचारों की कहानी बयान कर रही है। बक़ी के उजाड़ पड़े मज़ार हमें याद दिलाते हैं कि आज भी सत्य और असत्य के बीच संघर्ष जारी है। यह एक सच्चाई है कि अत्याचार चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो जाए, वह सत्य की शक्ति को दबा नहीं सकता।

मौलाना इरफ़ान मेहदी को हाल ही में मस्जिद-ए-आज़म, हरम-ए-हज़रत मासूमा क़ुम सलामुल्लाह अलैहा के अंतरराष्ट्रीय मामलों से संबंधित एक महत्वपूर्ण पद सौंपा गया है। इसी अवसर पर उन्होंने सम्मेलन के अंत में हज़रत मासूमा क़ुम के गुंबद और ज़रीह की प्रत्यक्ष ज़ियारत कराई तथा सभी मोमिनों की ओर से ज़ियारत भी पढ़ी।

एसएनएन चैनल के प्रधान संपादक मौलाना अली अब्बास वफ़ा ने अपने शानदार और प्रभावशाली संचालन से सम्मेलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में मौलाना महबूब मेहदी आबिदी नजफ़ी की दुआ के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।

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