हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , क़ुम के हौज़ा ए इल्मिया के छात्रों और उलेमा की प्रतिनिधि परिषद ने इस फैसले की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है।
बयान का पूरा पाठ
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
وَلَا تَحْسَبَنَّ اللَّهَ غَافِلًا عَمَّا یَعْمَلُ الظَّالِمُونَ»
और हरगिज़ यह न समझो कि अल्लाह उन कामों से बेखबर है, जो ज़ालिम करते हैं।
(सूरह इब्राहीम, आयत 42)
कुवैत की आपराधिक अदालत ने तथाकथित राज्य सुरक्षा मामलों की सुनवाई करने वाले विभाग में आयतुल्लाह शेख हुसैन अब्दुल्लाह अल-मअतूक, जो शिया धर्मगुरु और मजमा-ए-जहानी अहलेबैत (अ.स.) में कुवैत के प्रतिनिधि हैं, तथा दो अन्य व्यक्तियों को इस्लामी गणराज्य ईरान के लिए जासूसी करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। ये आरोप निराधार हैं।

हौज़ा ए इल्मिया के छात्रों और उलेमा की प्रतिनिधि परिषद इस अप्रिय और अमानवीय कदम की निंदा करती है। परिषद ने कुवैत के शासक नेतृत्व को चेतावनी दी है कि यहूदियों की इस तरह खुशामद और चापलूसी करने का अंजाम उन्हें भुगतना पड़ेगा।
इस्लामी उम्मत और दुनिया के स्वतंत्रता-प्रेमी लोग इस फैसले को पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण मानते हैं। वे इन कृत्यों की निंदा करते हुए ट्रंप और नेतन्याहू के अधीन बताई जा रही कुवैती अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं और उसके फैसले को अविश्वसनीय तथा महत्वहीन मानते हैं।
आयतुल्लाह मअतूक इस्लामी जगत की प्रमुख हस्तियों में से हैं और मानव समाज की सेवा के लिए संघर्ष करने वाले धर्मगुरुओं में गिने जाते हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि यदि उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई की गई, तो इसके जिम्मेदार लोगों को इस्लामी उम्मत के आक्रोश और घृणा का सामना करना पड़ेगा।
हौज़ा ए इल्मिया के छात्रों और उलेमा की प्रतिनिधि परिषद इस संघर्षशील धर्मगुरु के साथ एकजुटता व्यक्त करती है और उनकी तथा अन्य पीड़ित कैदियों की तत्काल रिहाई की मांग करती है।
परिषद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मानवाधिकार संगठनों से पुरज़ोर मांग करती है कि वे इस अन्यायपूर्ण फैसले और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन के खिलाफ हरगिज़ खामोश न रहें।
वस्सलामु अला मनित्तबअल हुदा।
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