हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय देश अल्बानिया के दक्षिण में स्थित ऊँचा पर्वत माउंट टोमोर (Mount Tomorr), हज़रत अब्बास अलमदार (अ) से जुड़े एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के कारण विशेष महत्व रखता है। समुद्र तल से लगभग 2,400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह स्थान अहलेबैत (अ) से प्रेम और श्रद्धा की एक अनूठी मिसाल माना जाता है।
हालाँकि हज़रत अब्बास अलमदार (अ) का वास्तविक मज़ार इराक के शहर कर्बला में है, लेकिन अल्बानिया के सूफ़ी विचारधारा से जुड़े बेकताशी सिलसिले में माउंट टोमोर को अत्यंत पवित्र स्थान प्राप्त है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, हज़रत अब्बास (अ) के जिस्म-ए-मुबारक से जुड़ी एक पवित्र निशानी या तबर्रुक इस स्थान पर दफन किया गया था। इसके बाद से यह क्षेत्र श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया।
ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार, इस स्थान पर पहली ख़ानक़ाह का निर्माण 1620 के दशक में शुरू हुआ था। कई सदियाँ बीत जाने के बावजूद इस स्थल का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कायम है। आज इसे अल्बानिया की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत में गिना जाता है।
हर साल 20 से 25 अगस्त तक अल्बानिया सहित दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु, जिनमें बेकताशी मुसलमान और अन्य ज़ायरीन शामिल होते हैं, दुर्गम रास्तों से गुजरकर माउंट टोमोर की ऊँची चोटी पर स्थित इस स्थल पर हाज़िरी देते हैं।
पाँच दिनों तक चलने वाली इस वार्षिक ज़ियारत के दौरान दुआ और इबादत के साथ-साथ क़ुर्बानी का भी आयोजन किया जाता है।
माउंट टोमोर पर हज़रत अब्बास अलमदार (अ) से जुड़ा यह ऐतिहासिक स्थल इस बात को दर्शाता है कि अहलेबैत (अ) से प्रेम और उनसे जुड़ी श्रद्धा किसी भौगोलिक सीमा की मोहताज नहीं है।
हजारों किलोमीटर की दूरी भी श्रद्धालुओं के दिलों में मौजूद प्रेम और लगाव को कम नहीं कर सकती।
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