हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मेरठ शहर की विभिन्न इमामबारगाहों में हर रोज मजलिस और मातम का सिलसिला जारी है। मरकज़ी इमामबारगाह छोटी कर्बला, घंटाघर में इमाम हुसैन (अ) की अज़ा की आठवीं मजलिस आयोजित की गई, जिसे हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद अब्बास बाक़री ने ख़िताब किया।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम का आठवाँ दिन कर्बला के अज़ीम अलमदार, साक़ी-ए-हरम हज़रत अबुल फ़ज़्लिल अब्बास (अ) की याद से विशेष रूप से जुड़ा हुआ है। दुनिया भर में इमाम हुसैन (अ) के मानने वाले इस दिन हज़रत अब्बास (अ) की अतुलनीय निष्ठा, साहस और बलिदान को याद करते हुए अलम निकालते हैं। यह अलम केवल कर्बला की सेना की निशानी नहीं, बल्कि इस्लामी मूल्यों, वफ़ादारी, ईसार और बहादुरी का प्रतीक भी है।
मौलाना ने कहा कि हज़रत अब्बास (अ) ने कर्बला में ऐसी वफ़ादारी का परिचय दिया जिसकी मिसाल इतिहास में नही मिलती। उन्होंने इमाम हुसैन (अ) और अहले हरम की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यहां तक कि जब युद्ध के दौरान उनके दोनों हाथ क़लम कर दिए गए, तब भी उन्होंने अलम को झुकने नहीं दिया और उसे अपने दांतों के सहारे थामे रखा, ताकि सत्य और न्याय का परचम बुलंद रहे।
अपने ख़िताब में मौलाना बाक़री ने हज़रत अब्बास (अ) की अंतिम घड़ियों का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि कर्बला में घायल होने वाले अन्य योद्धाओं के हाथ सुरक्षित थे, लेकिन हज़रत अब्बास (अ) दोनों बाज़ुओं से महरूम होकर घोड़े से ज़मीन पर गिरे। उस समय उन्होंने अपने भाई और इमाम, हज़रत इमाम हुसैन (अ) को पुकारा। इस दर्दनाक घटना का वर्णन सुनकर मजलिस में मौजूद अक़ीदतमंदो की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण ग़म और श्रद्धा से भर गया।
मजलिस में दानिश आबिदी और उनके साथियों ने सोज़ख़्वानी की। इसके बाद हज़रत अब्बास अलमदार के अलम की शबीह निकाली गई। इस ऐतिहासिक अलम की विशेषता यह है कि इसमें लगा फरेरा खाना-ए-काबा के गिलाफ के कपड़े से तैयार किया गया है। अंजुमन-ए-इमामिया मेरठ ने नौहाख़्वानी और मातम किया।
ज़ोहर और अस्र की नमाज़ के बाद अजाखाना शाह कर्बला वक्फ मंसबिया में मौलाना मुज़फ़्फ़र हुसैन ज़ैदी ने "इमामत और क़ुरआन" विषय पर मजलिस को खिताब किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में इमाम हुसैन (अ) के छह माह के बेटे हज़रत अली असगर (अ) की शहादत का उल्लेख किया। इस अवसर पर फ़िरोज़ अली ने सोज़ख़्वानी की और बड़ी संख्या में अज़ादार मौजूद रहे।
मोहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ़्फ़त ज़किया ने बताया कि मगरिब की नमाज़ के बाद दिल्ली गेट थाना क्षेत्र स्थित कोटला इमामबारगाह से जुलूस-ए-अलम निकाला गया। यह जुलूस छोटी कर्बला इमामबारगाह से होता हुआ अजाखाना शाह कर्बला पहुंचकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में अलम हसन मुर्तज़ा ने उठाया, जबकि इसके आयोजन की ज़िम्मेदारी शब्बीर हुसैन बब्लू ने निभाई। जुलूस में बड़ी संख्या में मोमेनीन और अज़ादारों ने भाग लिया।
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