शुक्रवार 16 अक्टूबर 2026 - 03:23
हुज्जतुल इस्लाम सय्यद सादिक हुसैनी का बुरहानपुर दौरा; अहले बैत (अ) की शिक्षाओं पर शैक्षणिक बैठकें और धार्मिक हस्तियों से मुलाकात

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में मुस्ससए तक़रीबे मज़ाहिबे हिंद के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सादिक हुसैनी ने अपने दौरे के दौरान विभिन्न धार्मिक मदरसों, सूफी खानकाहों और धार्मिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने उलमा, सूफी हस्तियों और अहले बैत (अ) से श्रद्धा रखने वाले लोगों से मुलाकात की। इस अवसर पर विद्यार्थियों के बीच अहले बैत (अ) की शिक्षाओं पर शैक्षणिक बैठकें आयोजित की गईं। साथ ही इमामत और इमाम अली (अ) की विलायत से जुड़े अक़ीदों संबंधी सवालों के जवाब भी दिए गए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में मुस्ससए तक़रीबे मज़ाहिबे हिंद के अध्यक्ष हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सादिक हुसैनी ने अपने दौरे के दौरान विभिन्न धार्मिक मदरसों, सूफी खानकाहों और धार्मिक स्थलों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने धार्मिक विद्वानों, सूफी हस्तियों और अहले बैत (अ) के श्रद्धालुओं से मुलाकात की। विद्यार्थियों के लिए अहले बैत (अ) की शिक्षाओं पर कई शैक्षणिक बैठकें आयोजित की गईं और इमामत व इमाम अली (अ) की विलायत से संबंधित अक़ीदों के सवालों के जवाब दिए गए।

बुरहानपुर मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है, जिसने फारूकी और मुगल काल में राजनीतिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस शहर का सूफीवाद और आध्यात्मिक परंपराओं से भी पुराना संबंध है। इसे शेख बुरहानुद्दीन गरीब से भी जोड़ा जाता है, जो दिल्ली के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्ग ख्वाजा निजामुद्दीन औलिया के प्रमुख शिष्यों में गिने जाते थे।

मुगल काल में बुरहानपुर सूफी संतों, कवियों और आध्यात्मिक विद्वानों की महत्वपूर्ण गतिविधियों का केंद्र था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शहर की आबादी लगभग पांच लाख है, जिनमें मुसलमानों की संख्या करीब 70 प्रतिशत बताई जाती है। शहर में लगभग 80 शिया परिवार रहते हैं, जिनके पास तीन हुसैनिया और एक मस्जिद है।

जामिया अशरफिया इज़हारुल उलूम में शैक्षणिक बैठकें

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सादिक हुसैनी ने जामिया अशरफिया इज़हारुल उलूम का दौरा किया। यहां विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों के बीच अहले बैत (अ) की पहचान, उनके जीवनचरित्र और शिक्षाओं के विषय पर कई बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए अहले बैत (अ) की सीरत और उनकी शिक्षाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मदरसे के निदेशक ओवैस अहमद निजामी हैं, जबकि मौलाना अहमद अशरफ अशरफी मदरसे के नाज़िम और संरक्षक हैं।

शाह बहाउद्दीन चिश्ती के मज़ार और खानकाह का दौरा

हुज्जतुल इस्लाम सय्यद सादिक हुसैनी ने बुरहानपुर के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्ग शाह बहाउद्दीन चिश्ती के मज़ार और खानकाह पर हाजिरी दी। शाह बहाउद्दीन चिश्ती का निधन 799 हिजरी में हुआ था। इस अवसर पर उन्होंने आस्ताने के मुतवल्ली और अन्य जिम्मेदार लोगों से मुलाकात की तथा उनके साथ आयोजित बैठक में हिस्सा लिया।

शाह बहाउद्दीन बाज़न बुरहानपुर के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्गों में गिने जाते हैं। परंपरा के अनुसार, लगातार मौन रहने और गहरी आध्यात्मिक अवस्था के कारण उन्हें ‘चुप शाह’ यानी मौन रहने वाले बादशाह के नाम से भी याद किया जाता है। उनका मज़ार और खानकाह आज भी आध्यात्मिक रुचि रखने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र है।

छोटा अजमेर और अन्य सूफी स्थलों की जियारत

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सादिक हुसैनी ने बुरहानपुर के लालबाग क्षेत्र में स्थित छोटा अजमेर का भी दौरा किया। यह स्थान क्षेत्र के महत्वपूर्ण सूफी केंद्रों में गिना जाता है। यहां हर गुरुवार को विभिन्न धर्मों के श्रद्धालु एकत्र होते हैं और कव्वाली तथा समा की महफिलें आयोजित की जाती हैं।

उन्होंने मसूद शाह मदनी के मज़ार पर भी हाजिरी दी। यह स्थान बुरहानपुर में सूफी परंपरा और इस्लामी आध्यात्मिकता से जुड़े प्रसिद्ध स्थलों में शामिल है।

इसी तरह उन्होंने आस्ताना अब्दुल गफूर बख्श अल्लाह शाह अशरफी का भी दौरा किया। अब्दुल गफूर बख्श अल्लाह शाह अशरफी भारत के प्रसिद्ध सूफी बुजुर्गों में गिने जाते थे। उनका निधन 20 रमज़ान, 30 मई 1986 को हुआ था। उनका आस्ताना सिलसिला-ए-अशरफिया और चिश्तिया से जुड़े मुरीदों तथा श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

सय्यद अब्दुलबाकी अशरफी से कई मुलाकातें

हुज्जतुल इस्लाम सय्यद सादिक हुसैनी ने आस्ताना अशरफिया के मुतवल्ली सय्यद अब्दुलबाकी अशरफी से कई बार मुलाकात की। इन बैठकों में शहर की प्रमुख हस्तियों ने भी भाग लिया।

सय्यद अब्दुलबाकी अशरफी एक विद्वान और आध्यात्मिक व्यक्तित्व होने के साथ-साथ कवि भी हैं। उनका एक काव्य संग्रह उपलब्ध है। वे अहले बैत (अ) से प्रेम और श्रद्धा रखते हैं तथा उनकी प्रशंसा और मनकबत में कई कविताएं कह चुके हैं। उनकी उम्र लगभग 96 वर्ष बताई जाती है। शहर में उनके कई मुरीद और श्रद्धालु हैं।

मस्जिद शाही में शहर के काज़ी से मुलाकात

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सादिक हुसैनी ने बुरहानपुर की मस्जिद शाही का दौरा किया, जहां उन्होंने शहर के काज़ी मौलवी सय्यद अनवरुल्लाह बुखारी से मुलाकात की। इस अवसर पर देवबंदी विचारधारा से जुड़े मदरसों के जिम्मेदार लोग भी मौजूद थे। उनके साथ विभिन्न धार्मिक विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

मस्जिद जाफरी में इमामे जुमा से मुलाकात

मौलाना सय्यद सादिक हुसैनी ने बुरहानपुर में शिया समुदाय की मस्जिद जाफरी का दौरा किया। मस्जिद के मुतवल्ली आबिद क़िज़िलबाश की मौजूदगी में उन्होंने इमामे जुमा हुज्जतुल इस्लाम हसन अख्तर से मुलाकात की। इस अवसर पर शहर के शिया समुदाय और उसकी धार्मिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

इमामत और विलायत से संबंधित अक़ीदों पर बैठकें

सय्यद अब्दुलबाकी अशरफी के अनुयायियों और श्रद्धालुओं के अक़ीदों से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सादिक हुसैनी ने दो विस्तृत बैठकें आयोजित कीं। ये बैठकें गुरुवार और शुक्रवार को हुईं, जिनमें 10 से 12 लोगों ने भाग लिया।

इन बैठकों में इमामत, इमाम अली (अ) की विलायत और उनकी अफ़ज़लियत से संबंधित महत्वपूर्ण सवालों पर चर्चा की गई। इन विषयों के संबंध में अक़ीदे से जुड़े तर्क और प्रमाण भी प्रस्तुत किए गए।

मदरसा उर्दू अरबी सुमनानी में बैठक

दौरे के अंतिम कार्यक्रमों में मदरसा उर्दू अरबी सुमनानी का दौरा भी शामिल था। यहां मदरसे के जिम्मेदार लोगों और विद्यार्थियों के साथ बैठक हुई, जिसमें शैक्षणिक और धार्मिक विषयों पर चर्चा तथा विचारों का आदान-प्रदान किया गया।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सादिक हुसैनी के इस दौरे में धार्मिक मदरसों के विद्यार्थियों से संपर्क स्थापित करने, अहले बैत (अ) की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार, विभिन्न धार्मिक और शैक्षणिक हस्तियों से मुलाकात तथा अक़ीदों से जुड़े सवालों के जवाब देने पर विशेष ध्यान दिया गया।

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