इतिहास गवाह है कि जुल्म कभी अपनी ताकत से नहीं जीता, बल्कि मज़लूम के समर्थकों की ख़ामोशी से जीता है। जब हक़ के पैरोकार अकेले रह जाएँ और बाकी सब दर्शक बन जाएँ, तो जुल्म को रास्ता मिल जाता है। यही…