हरम ए हज़रत मसूमा स.ल. (7)
-
ईरानहज़रत मासूमा (स) हिजाब और इस्मत की रक्षा के लिए मुख्य आदर्श हैं
जामेअ मुदर्सेरीन हौज़ा ए इल्मिया कुम की जनरल असेंबली के प्रमुख ने इस्लामी समाज में महिलाओं के महत्व और स्थान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़रत मासूमा (स) पवित्रता और हिजाब की रक्षा के लिए मुख्य…
-
ईरानजंग के दौरान खिदमत का अनोखा जज़्बा; क़ुम अल मुकद्दस में भारतीय छात्रों का 'मौकिब-ए-हिंदिया' से लेकर हज़रत मासूमा (स.ल.) के हरम तक ज़ायरीन की लगातार सेवा का सिलसिला जारी
हौज़ा / जंग के दौरान,क़ुम अल मुकद्दस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों ने सेवा, ईमानदारी और त्याग की एक नायाब मिसाल कायम करते हुए, पहले "मौकिब-ए-हिंदिया" के ज़रिए लगभग चालीस दिनों तक लगातार मोमिनों…
-
हरम ए हज़रत मासूमा (स) के मुतवल्ली:
उलेमा और मराजा ए इकरामअहले बैत (स) के हरम लोगों के लिए आध्यात्मिक और मानसिक शांति का स्थान हैं
हौज़ा / हरम ए मुक़द्दस हज़रत मासूमा स.ल. के मुतवल्ली ने कहा, पवित्र स्थानों को चाहिए कि वे समाज की ज़रूरतों और इस्लामी दुनिया में होने वाले परिवर्तनों के अनुरूप तार्किक और पारदर्शी रुख अपनाएँ…
-
ईरानहज़रत फ़ातिमा स.अ. ने अपने अमल से साबित किया कि बुराइयों पर चुप रहना जायज़ नहीं है। हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मोमनी
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद हुसैन मोमेनी ने कहा कि हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.अ.) ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि बातिल के सामने चुप्पी साध लेना गुनाह है और यही तरीक़ा हक़ीकी मुंतज़िराने…
-
ईरानमासूमा ए क़ुम (स) में हज़रत ज़ैनब (स) की विलादत के मौके पर जश्न का आयोजन
हौज़ा / हज़रत ज़ैनब-ए-कुबरा सलामुल्लाह अलैहा की विलादत की मुबारक़ मौके पर हरम-ए-मुबारक हज़रत मासूमा स.ल. में "हयअत-ए-क़ुरआनियान" के विषय से एक जश्न-ए-विलादत का आयोजन किया गया। यह प्रोग्राम मरकज़-ए-क़ु…
-
ईरानबे हिजाबी को बढ़ावा देना दुश्मनों की साजिश है/हिजाब ईमान और इज्ज़त की अलामत है। हुज्जतुल इस्लाम सैयद सादिक मीरशफीई
हौज़ा / हज़रत मासूमा स.ल. के हरम में खिताब फरमाते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद सादिक मीरशफीई ने कहा कि जब पाप सार्वजनिक हो जाता है तो धार्मिक और नैतिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है, इसलिए…
-
धार्मिकहज़रत मासूमा स.ल. की ज़ियारत करने वालो के लिए जन्नत का वादा शर्त के साथ है या बिना शर्त?
हौज़ा / हज़रत इमाम जाफर सादिक अ.स.ने फरमाया,فمن زارھا وجبت لہ الجنۃ का अर्थ यह है कि जिसने भी उनकी ज़ियारत की, उसके लिए जन्नत वाजिब हो गई।लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है यह वादा बिना शर्त नहीं है।…