सोमवार 31 मार्च 2025 - 13:29
कुछ पड़ोसी देशों का दोहरा रवैया दरअसल उनकी कमज़ोरी और साम्राज्यवादी शक्तियों के डर का परिणाम है। आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी

हौज़ा / जामेआ-ए-मुदर्रिसीन हौज़ा इल्मिया क़ुम के प्रमुख आयतुल्लाह सैयद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने कहा कि कुछ पड़ोसी देशों का दोहरा रवैया वास्तव में उनकी कमज़ोरी और साम्राज्यवादी शक्तियों के भय का नतीजा है। वे स्वयं भी स्वीकार करते हैं कि ईरानियों जैसा साहस और हिम्मत उनमें नहीं है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, जामेआ-ए-मुदर्रिसीन हौज़ा इल्मिया क़ुम के प्रमुख आयतुल्लाह सैयद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने कहा कि कुछ पड़ोसी देशों का दोहरा रवैया दरअसल उनकी कमजोरी और साम्राज्यवादी शक्तियों के डर का परिणाम है। वे स्वयं भी स्वीकार करते हैं कि ईरानियों जैसा साहस और हिम्मत उनमें नहीं है।

उन्होंने यह बात सिपाह अली बिन अबी तालिब (अ) के कमांडर से मुलाकात के दौरान कही, आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने सिपाहे पासदारान को इंक़लाब की सेवा में अग्रणी बताते हुए कहा कि हालांकि यह पवित्र संगठन क्रांति की सफलता के कुछ समय बाद स्थापित हुआ लेकिन इसने अपनी उत्कृष्ट सेवाओं से न केवल पिछली कमियों को पूरा किया बल्कि भविष्य के लिए भी प्रगति की गति को तेज कर दिया।

उन्होंने आगे कहा कि रहबर-ए-मुअज़्ज़म इंक़लाब (सर्वोच्च नेता) का मार्गदर्शन इस देश के लिए बहुत बड़ी नेमत है, लेकिन दुर्भाग्यवश, हम इस नेमत की उस तरह कद्र नहीं कर रहे जैसी हमें करनी चाहिए।

इमामे जुमा क़ुम ने कहा कि जब किसी व्यक्ति या समाज में ईमान की ताकत नहीं होती तो वह बड़ी शक्तियों के सामने घुटने टेक देता है। लेकिन हमारे लिए आदर्श (रोल मॉडल) इमाम हुसैन (अ) हैं।

जिन्होंने हैय्हात मिन्ना ज़िल्लाह का नारा बुलंद किया। उन्होंने दुनियावी मानकों के अनुसार हारने के बजाय सम्मान और गौरव का मार्ग अपनाया, और आज अगर हमें दुनिया में इज्जत हासिल है तो वह आशूरा की बरकत से है।

आयतुल्लाह हुसैनी बुशहरी ने अलमी यौमे कुद्स (अंतरराष्ट्रीय यौमे कुद्स) की रैलियों में जनता की व्यापक भागीदारी को ईरान की शक्ति और दुश्मनों के लिए भय का कारण बताया। उन्होंने इस आशा को व्यक्त किया कि जल्द ही दुश्मन की सांस्कृतिक आक्रमण का भी अंत होगा।

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