हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईदुल-फित्र के दिन आयतुल्लाह शेख मुहम्मद याक़ूबी ने नजफ अशरफ में ईद की नमाज़ के खुतबे में कुरान की आयतों के प्रकाश में सत्य के अर्थ और अधिकांश लोगों द्वारा इसके विरोध पर बात करते हुए कहा, सत्य, अल्लाह के सुंदर नामों में से एक है और अधिकांश लोग इससे दूर हो चुके हैं।
उन्होंने सूरह मोमिनून की आयत 70 और सूरह जुखरुफ की आयत 78 की ओर इशारा करते हुए कहा, अल्लाह तआला फरमाता है क्या वे कहते हैं कि उसे पागलपन है? (ऐसा नहीं) बल्कि वह उनके पास सत्य लेकर आया है, लेकिन उनमें से अधिकांश सत्य को नापसंद करते हैं।(मोमिनून: 70) इसी तरह इरशाद होता है हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए लेकिन तुममें से अधिकांश लोग सत्य को नापसंद करते हैं। (जुखरुफ: 78)
आयतुल्लाह याक़ूबी ने कहा, अहल-ए-बैत अलैहिमुस्सलाम ने इस बात पर जोर दिया है कि सत्य के लोगों पर अत्याचार न किया जाए। उन्होंने आगे कहा, मासूमीन अलैहिमुस्सलाम की नज़र में न केवल सत्य के लोगों पर ज़ुल्म, बल्कि उनके समर्थन से हाथ खींच लेना और सत्य को असहाय छोड़ देना भी बातिल का समर्थन करने के बराबर है।
नजफ अशरफ के इस विद्वान ने अमीरुलमोमिनीन अली अलैहिस्सलाम के कथन का हवाला दिया, जिसमें आप अलैहिस्सलाम ने उन लोगों की निंदा की जो आपकी बैअत से दूर रहे और कहा,जो व्यक्ति सत्य की मदद नहीं करता और असत्य को नहीं छोड़ता वह वास्तव में असत्य का समर्थन कर रहा होता है।
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