गुरुवार 28 अगस्त 2025 - 23:39
हज़रत इमाम हुसैन अ.स. से सच्चा प्यार करने वाला कभी भी ज़ालिम का साथ नहीं देगा। मौलाना हयात अब्बास नजफी

हौज़ा / मजलिस ए अज़ा के दौरान एम.डब्ल्यू.एम. नेता ने कहा कि इमाम अली अ.स. को मानने वाले शहादत से कभी नहीं घबराते हैं इमाम अली अ.स. परहेज़गारों के इमाम हैं, जिसके दिल में परहेज़गारी होगी, वह मौला अली अ.स. से प्यार भी करेगा और कुरआन मजीद से हिदायत भी हासिल कर सकता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मजलिस ए वहदत ए मुस्लिमीन जिला शर्की कराची और दुआ कमेटी पाकिस्तान की तरफ से वापसी-ए-अहल-ए-हरम अ.स.मदीना और शहादत-ए-इमाम हसन अल-अस्करी अ.स.के सिलसिले में छह दिनी मजलिस-ए-अज़ा मस्जिद व मजलिस शाह खुरासान रोड सोल्जर बाज़ार में जारी है।

मजलिस-ए-अज़ा के दूसरे दिन खुतबात-ए-इमाम हुसैन अ.स. और विलायत-ए-इमाम हुसैन अ.स. के मौज़ू पर बात करते हुए मौलाना हयात अब्बास नजफी ने कहा कि इमाम (अ.स.) का नाम जिस ज़बान पर आता है, ऐसा शख्स कभी भी जालिम का साथ नहीं देता है।

इमाम हुसैन अ.स.की शख्सियत मज़लूमों के लिए हौसला का बाइस हैं। इमाम हुसैन (अ.स.) से सच्चा प्यार करने वाले जालिम के सामने कभी भी सर नहीं झुकाते हैं। इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपनी ज़िंदगी का पहला खुतबा कमसिनी में दिया, जिसमें सबसे पहले विलायत-ए-इमाम अली (अ.स.) का दफ़ा किया। इमाम हुसैन (अ.स.) अमामा पहनते थे तो रसूल-ए-खुदा स.अ.व.की तरह दिखाई देते थे।

मौलाना हयात अब्बास नजफी ने कहा कि इमाम अली (अ.स.) को मानने वाले शहादत से कभी नहीं घबराते हैं। इमाम अली (अ.स.) परहेज़गारों के इमाम हैं, जिसके दिल में परहेज़गारी (तक़्वा) होगी, वह मौला अली (अ.स.) से प्यार भी रखेगा और कुरआन मजीद से हिदायत भी हासिल कर सकता है।

मौलाना हयात अब्बास का कहना था कि इमाम हुसैन अ.स.जानते थे कि दुश्मन उन्हें मदीना में क़त्ल करना चाहते हैं। इमाम अ.स.ने कहा कि बदन के लिए मौत अगर ज़रूरी है तो शहादत सबसे बेहतर मौत है। उन्होंने कहा कि अज़ादारी अगर सही अहदाफ़ के साथ हो तो इससे यज़ीदी ताक़तें हमेशा परेशान रहती हैं। मजलिस के आग़ाज़ में क़ारी अली हैदरी ने कुरआन पाक और हदीस-ए-कसा की तिलावत की जबकि सलाम ख़्वानी तालिब हुसैन तालिब ने की।

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