हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह हदीस बिहार उल-अनवार नामक पुस्तक से वर्णित है। इस हदीस का पाठ इस प्रकार है:
قال رسول اللہ صلی اللہ علیه وآله:
اغْتَسِلْ في كُلِّ جُمُعةٍ و لَو أنّكَ تَشْتري الماءَ بِقُوتِ يَومِكَ و تَطْويهِ، فإنَّهُ ليسَ شَيءٌ مِن التَّطَوُّعِ أعْظَمَ مِنهُ.
अल्लाह के रसूल (स) ने फ़रमाया:
हर जुमे को ग़ुस्ल करो, भले ही जुमे के ग़ुस्ल के लिए पानी जुटाने के लिए तुम्हें उस दिन का खाना बेचना पड़े, फिर भी उसे बेच दो और भूखे रहो, क्योंकि ज़ुमा के ग़ुस्ल से बढ़कर कोई मुसतहब अमल नहीं है।
बिहार उल अनवार, भाग 81, पेज 129
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