रविवार 31 अगस्त 2025 - 14:17
इमाम हसन अस्करी (अ) पूरी तरह से नज़रबंद थे

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन इब्राहिमी ने कहा, इमाम हसन अस्करी (अ) की सख्त नज़रबंदी इसलिए थी क्योंकि अत्याचारी खलीफाओं को मेंहदी मौऊद (अ) के आगमन की खबर थी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन इब्राहिमी ने कहा, इमाम हसन अस्करी (अ) की सख्त नज़रबंदी इसलिए थी क्योंकि अत्याचारी खलीफाओं को मेंहदी मौऊद अ.ज. के आगमन की खबर थी।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन नासिर इब्राहिमी, जो क़ुम के हौज़ा-ए-इल्मिया के शिक्षक है ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के संवाददाता से सारी में बातचीत में इमाम हसन अस्करी (अ) की शहादत की वर्षगाँठ पर शोक व्यक्त करते हुए कहा,आइम्मा ए ताहेरीन (अ) में से इस इमाम की पवित्र जीवन के कुछ पहलू उनकी विशेष विशेषताएँ हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया, आइम्मा ए ताहेरीन अ.स.में, इस इमाम के पास इमामत की सबसे कम अवधि थी; क्योंकि उनकी इमामत की अवधि केवल 6 वर्ष थी।

क़ुम के हौज़ा के शिक्षक ने इमाम अ.स.की नज़रबंदी और निगरानी का उल्लेख करते हुए याद दिलाया,यह कठोरता इसलिए लागू की गई थी क्योंकि खबरें थीं कि इमाम (अ) के यहाँ एक संतान होगी जो दुनिया को न्याय और इंसाफ से भर देगी, इसलिए बनी अब्बास के शासकों और खलीफाओं ने इस इमाम को हमेशा सख्त नज़रबंदी में रखा और उन पर नज़र रखी।

उन्होंने कहा इमाम हसन अस्करी (अ) आइम्मा ए ताहेरीन (अ) में एकमात्र ऐसे इमाम हैं जो हज पर नहीं गए, क्योंकि वह पूरी तरह से नज़रबंद थे और अत्याचारी शासन उन्हें सामर्रा से बाहर निकलने की अनुमति नहीं देता था।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन इब्राहिमी ने इमाम हसन अल-अस्करी अ.स.का केवल एक ही संतान थी, जो इमाम ज़माना (अ.ज.) हैं, जो एक नरगिस खातून से पैदा हुए शायद इसका कारण यह था कि इमाम (अ) के बाद उनके संतानों के बीच उत्तराधिकार और इमामत के मामले में किसी के लिए कोई संदेह या शक न रहे।

उन्होंने कहा,इमाम हसन अलअस्करी (अ) इमामत की श्रृंखला के अंतिम इमाम हैं जो शहीद हुए, और उनके बाद उनके पुत्र इमाम महदी (अ.ज.) इमाम बने, जो आज तक जीवित है और इमाम हैं।

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