हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र की सुप्रीम काउंसिल ऑफ़ इस्लामिक अफ़ीयरज़ के सदस्य शेख ख़ालिद अल जुंदी ने कहाः क़ब्रो की ज़ियारत एक जायज़ और मतलूबा अमल है क्योकि यह परलोक की याद दिलाता है और साहिब क़ब्र को सलाम और उनके लिए दुआ करना उनकी बख्शिश का कारण बनता है।
उन्होने आगे कहाः वह स्वंय अहले बैत (अ) की ज़ियारत, उनकी ज़रीह और मज़ारात की ज़ियारत और इसी तरह क़ब्रो की ज़ियारत को पसंद करते है और उसे अल्लाह तआला के निकट के हुसूल का ज़रीया समझते है।
शेख ख़ालिद अल जुंदी ने यह बात एक टीवी प्रोग्राम "ला अल्लहुम यफ़हमून" मे की जो "DMC" चैनल पर प्रसारित होता है।
उन्होने आगे कहाः क़ब्रो की ज़ियारत एक जायज़ और पूर्ण रूप से शरई और मतलूब अमल है।
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