हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्टर से बातचीत करते हुए जामेअतुज़ ज़हरा (स) के अध्यापक मुहम्मद रज़ाई ने कहाः आख़ेरुज़ ज़मान के दंगो और समस्याओ से सामना करने के लिए सब्र और समझदारी की ज़रूरत है।
उन्होने कहाः अमीरुल मोमेनीन अलैहिस सलाम ख़ुत्बा न 173 मे फ़रमाते है किः वला यहमेलो हाज़ल अलमा इल्ला अहलुल बरसे वस सब्रे और आख़ेरुज़ ज़मान के दंगो मे इस युद्ध के झंडे को वही उठाएगा जो नज़र रखने वाला, मुसीबतो पर सब्र करने वाला और हक़ के मक़ामात को पहचनाने वाला हो। अतः इन देंगो का मुकाबला करने के लिए सब्र के साथ बसीरत भी ज़रूरी है।
हौज़ा ए इल्मिया और यूनिवर्सिटी के अध्यापक ने आगे कहाः बसीरत हासिल करने का एक मात्र मार्ग क़ुरआन करीम और अहले बैत (अ) से प्रेम और उनके अनुसरण मे है।
उन्होने कहा हमे इत्तेहाद और वहदत को क़ुरआन और अहले बैत (अ) की छत्र छाया मे परवान चढ़ाना चाहिए और व्यवहारिक रूप से उनके निर्दोशो पर अमल करना चाहिए।
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