हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने दूसरो के सामने इस्लामी निज़ाम के कमज़ोर और कमीयो को बयान करने के संबंध मे किए गए सवाल का जवाब दिया है जिसे हम अपने प्रिय पाठको की सेवा मे प्रस्तुत कर रहे है।
इस्लामी निज़ाम की कमज़ोरीयो और कमीयो के संबंध मे बयानात को सुनना या लोगो को बताना
सवालः कुछ लोग दूसरो के सामने इस्लामी सरकार की कमज़ोरीयो और कमीयो के संबंध मे बयानात देने लगते है, ऐसे लोगो की बातचीत सुनना और फिर उस चीज़ को दूसरो के सामने बयान करने का क्या हुक्म है?
जवाबः स्पष्ट है कि हर वह अमल जो कुफ्र और वैश्विक उपनिवेशवाद के सामने डट कर खड़े रहने वाले इस्लामी गणतंत्र के चेहरे को दाग़दार और बदनाम करे, इस्लाम और मुस्लमानो के हक मे नही है, अतः इस प्रकार की बातचीत इस्लामी निज़ाम को कमज़ोर करने का कारण बने तो कदापि उसे सुनना जायज़ नही है।
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