हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनई ने नमाज़ जुमा छोड़ने से संबंधित एक सवाल का जवाब दिया है। जिसे दिलचस्पी रखने वाले के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
सवालः अगर बिना किसी शरई बहाने के नमाज़े जुमा मे हाज़िर न हूँ तो क्या मै मुनाफ़िक़ हो गया, और मैने गुनाह किया ?
जवाबः अगर चे वर्तमान समय मे नमाज़े जुमा वाजिब तखईरी है और उसका छोड़ना हराम नही है लेकिन एहतियात मुस्तहब यह है कि वर्तमान समय मे ईरान मे हुकूमत इस्लामी है अतः जहा तक संभव हो सके नमाज़े जुमा छूटनी नही चाहिए। नमाज़े जुमा मे शरीक होने के आसार और लाभ की बिना पर उचित नही है कि एक मोमिन अपने को इसकी बरकतो से वंचित करे।
आपकी टिप्पणी