हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आज सुबह इस्लामी इंक़ेलाब के नेता आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम की पैग़म्बरी के एलान ईद, ईदे बेसत पर, तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में, अवाम के विभिन्न वर्गों के हज़ारों लोगों से मुलाक़ात में इस ईद की बधाई दी।
उन्होंने इस्लाम की आज के मानव समाज में इस्लाम के आग़ाज़ जैसे बदलाव लाने और जाहेलियत, ज़ुल्म, ताक़त, डर और साम्राज्यवाद से ग्रस्त समाजों को, सुधार, नजात और सज्जनता पर आधारित समाज में बदलने की इस्लाम की अपार सलाहियत की ओर इशारा किया। उन्होंने अमरीकी फ़ितने के योजनाकारों और इसे बढ़ावा देने वालों के मुक़ाबले में इस्लामी गणराज्य की पोज़ीशन को बयान किया। रहबरे इंक़ेलाब ने 12 जनवरी के दिन राष्ट्रीय कारनामे की सराहना की और बल दिया कि ईरानी क़ौम ने फ़ितने की कमर तोड़ दी लेकिन इस फ़ितने के स्वभाव, इसके लक्ष्य, इस फ़ितने के ट्रेंड और धोखा खाए हुए तत्वों को अच्छी तरह पहचानना चाहिए।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम की पैग़म्बरी के एलान के दिन की ईद, ईदे बेसत को, क़ुरआन के जन्म, संपूर्ण इंसान की तरबियत के लिए अल्लाह की शिक्षाओं से इंसान की आगाही का दिन, इस्लामी सभ्यता के आग़ाज़ का दिन और न्याय, भाईचारे और समानता के परचम के लहराने का दिन बताया।
उन्होंने आज के मानव समाजों ख़ास तौर पर पश्चिमी समाजों को गहरे नैतिक भ्रष्टाचार, ज़ुल्म, अन्याय, मुंहज़ोरी और साम्राज्यवाद से ग्रस्त बताया और कहाः इस्लाम और मोमिन मुसलमान आज की दुनिया को जो तबाही और भ्रष्टाचार के दर्रे में गिरने के मुहाने पर है, भलाई, नजात और सज्जनता की चोटियों और नरक से स्वर्ग की ले जा सकते हैं इस शर्त के साथ कि गहरे ईमान के साथ पूरे तौर पर अमल करें।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने अपनी स्पीच के एक भाग में हालिया फ़ितने की ओर इशारा करते हुए जिससे अवाम और मुल्क को नुक़सान पहुंचा, इस फ़ितने को अमरीकी फ़ितना बताया जिसे क़ौम, अधिकारियों और तजुर्बेकार फ़ोर्सेज़ ने नाकाम कर दिया।
उन्होंने विभिन्न फ़ितनों के पीछे अमरीका के मुख्य लक्ष्य को बयान करते हुए कहाः सिर्फ़ मौजूदा राष्ट्रपति नहीं बल्क अमरीका की स्थायी नीति और लक्ष्य ईरान को निगलना और हमारे मुल्क पर अपने सैन्य कंट्रोल, राजनैतिक और आर्थिक वर्चस्व को थोपना है क्योंकि इतनी बड़ी सरज़मीन, आबादी, सुविधाओं और वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकीय तरक़्क़ी से संपन्न मुल्क को, जो भौगोलिक लेहाज़ से ऐसे संवेदनशील केन्द्र में स्थित है, वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने पिछले फ़ितनों में पश्चिमी अधिकारियों के हस्तक्षेप के स्तर को, मुख्य रूप से मीडिया और दूसरे दर्जे के राजनेताओं तक सीमित बताया और कहाः लेकिन हालिया फ़ितना ऐसा था जिस में अमरीका के राष्ट्रपति ने ख़ुद हस्तक्षेप किया, बयान दिया, धमकी दी और फ़ितना करने वालों को प्रेरित करने के लिए संदेश दिया कि आगे बढ़ो, डरो नहीं, हम तुम्हारी सैन्य मदद करेंगे।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने अमरीकी राष्ट्रपति के बयान को, जिस में उन्होंने विध्वंसक कार्यवाहियां करने वालों, इंसानों की जान लेने वालों को ईरानी क़ौम कहा, क़ौम पर बहुत बड़ा इल्ज़ाम लगाने वाला बयान बताया और कहाः अमरीकी राष्ट्रपति ने खुल्लम खुल्ला दंगा करने वालों को उकसाया और पीछे से अमरीका और ज़ायोनी शासन ने उनकी मदद भी की; इसलिए हम अमरीकी राष्ट्रपति को, जानी और माली नुक़सान और ईरानी क़ौम पर इल्ज़ाम लगाने की वजह से मुजरिम मानते हैं।
उन्होंने ज़मीनी स्तर पर विध्वंस करने वाले तत्वों के प्रकार की व्याख्या में कहाः ज़मीनी स्तर पर सरगर्म तत्व दो तरह के थे, उन में से कुछ को अमरीकी और इस्राईली जासूसी तंत्र ने बड़ी बारीकी से चुना था जिन्हें उन्होंने बहुत बड़ी रक़म दी, उन्हें ट्रेंड किया था और इन दुष्ट व मजुरिम तत्वों की बड़ी तादाद को पुलिस और सुरक्षा बलों ने बड़ी समझदारी से पकड़ लिया।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने ज़मीनी स्तर पर सक्रिय तत्वों के दूसरे वर्ग को ऐसे नौजवान और जवानों पर आधारित बताया जो पहले वर्ग के प्रभाव में आ गए। उन्होंने कहाः इस दूसरे वर्ग का ज़ायोनी शासन या जासूसी तंत्रों से कोई संबंध नहीं था बल्कि ऐसे नादान लोग थे जिसे पहले वाला वर्ग प्रभावित और उत्तेजित करता जिसके नतीजे में उन्होंने दुष्ट हरकतें कीं।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने कहाः ये पश्चिम समर्थित सिस्टम के मोहरे थे, जिन्हें घरों, दफ़्तरों और औद्योगिक केन्द्रों पर हमले का काम सौंपा गया था और अफ़सोस कि नादान तत्वों ने दुष्ट और ट्रेंड तत्वों की अगुवाई में दुष्ट हरकतें और बड़े जुर्म किए और 250 मस्जिदों और 250 से ज़्यादा शिक्षा केन्द्रों में विध्वंस किया, बिजली घरों, बैंकों, अस्पतालों, क्लिनिक और खाद्य पदार्थ वितरण केन्द्रों को नुक़सान पहुंचाया और कई हज़ार लोगों का क़त्ल किया।
उन्होंने एक मस्जिद में कुछ नौजवानों को क़ैद करने और ज़िंदा जलाने, या तीन साल की बच्ची और बेगुनाह व निहत्थे मर्द और औरत को जान से मारने जैसी अमानवीय व बर्बरतापूर्ण करतूतों की ओर इशारा किया और कहाः ये करतूतें, पहले से तैयार साज़िश का हिस्सा थीं और वे चाक़ू और बंदूक़ से लैस थे कि इन हथियारों को विदेश से लाया गया और उसे फ़ितना करने वालों के बीच बांटा गया कि वे ऐसे अपराध करें।
इस्लामी इंक़ेलाब के वरिष्ठ नेता ने इस बात पर बल दिया कि ईरानी क़ौम ने साज़िश की कमर तोड़ दी है, कहाः ईरानी क़ौम ने 12 जनवरी की रैली से, जिसमें दसियों लाख लोगों ने शिरकत से, इस दिन को अपने कारनामों से भरी किताब में ऐतिहासिक दिन में बदल दिया और दावेदारों के मुंह पर ज़बरदस्त मुक्का मार कर जिनकी बातें बकवास से भरी थीं, फ़ितने को ख़ामोश कर दिया।
उन्होंने हालिया फ़ितने में ईरानी क़ौम के हाथों अमरीका की हार को, 12 दिवसीय जंग में अमरीका और ज़ायोनी शासन की हार की एक कड़ी बताया और कहाः उन्होंने इस फ़ितने को बड़ी करतूतों की भूमिका के तौर पर शुरू किया लेकिन क़ौम ने फ़ितने को दबा दिया लेकिन यह काफ़ी नहीं है बल्कि अमरीका को अपनी करतूतों का जवाब देना होगा।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने विदेश मंत्रालय सहित ज़िम्मेदार तंत्रों को अमरीका के ताज़ा अपराध के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के लिए बल दिया और कहाः हम मुल्क को जंग की ओर नहीं ले जाएंगे लेकिन आंतरिक मजुरिओं और उनसे भी बुरे अंतर्राष्ट्रीय अपराधियों को नहीं छोड़ेंगे; इस के लिए विशेष शैली से कोशिश होनी चाहिए।
इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने बल दिया कि अल्लाह की तौफ़ीक़ से ईरानी क़ौम ने जिस तरह फ़ितने की कमर तोड़ दी, उसी तरह फ़ितना करने वालों की भी कमर तोड़ दे।
उन्होंने अपनी स्पीच के अंत में पुलिस, सुरक्षा बल, आईआरजीसी, स्वंयसेवी बल बसीज और अधिकारियों की अमरीकी-ज़ायोनी फ़ितने के ख़िलाफ़ कामयाब संघर्ष में दिन रात की मेहनतों और बलिदान की ओर इशारा करते हुए कहाः देश के सभी अधिकारियों ने सहयोग किया और क़ौम ने भी अपनी मोहर लगा दी और अपनी एकता से काम को पूरी दृढ़ता से ख़त्म कर दिया।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अवाम की आर्थिक स्थिति और अधिकारियों की ओर से इस संबंध में ज़्यादा कोशिश किए जाने पर बल देते हुए कहाः आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, अवाम की आर्थिक स्थिति वाक़ई सही नहीं है, अधिकारियों को चाहिए कि कुछ क्षेत्रों जैसे मूल ज़रूरत की चीज़ों और पशुपालन उद्योग की ज़रूरत की चीज़ों की आपूर्ति, खाद्य पदार्थ और अवाम की ज़रूरत की चीज़ों की आपूर्ति में ज़्यादा गंभीरता के साथ और दुगुनी मेहनत करें कि अगर अवाम और अधिकारी अपने फ़रीज़े पर अमल करें तो अल्लाह निश्चित तौर पर बरकत देगा।
आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अवाम के बीच एकता बनी रहने पर हमेशा की अपनी ताकीद को दोहराते हुए कहाः धड़ों और राजनैतिक दलों के बीच मतभिन्नता और वैचारिक विवादों को अवाम के बीच प्रचलित नहीं होना चाहिए बल्कि हम सब इस्लामी सिस्टम, प्यारे वतन ईरान की रक्षा में एक साथ, एकजुट और एक रहें।
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