सोमवार 26 जनवरी 2026 - 16:33
अहले बैत (अ) का मार्ग,कुर्बानी का मार्ग हैः हुज्जतुल इस्लाम मुहम्मद हाज अबुल कासिम

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हाज अबुल कासिम ने कहा, सूरह इंसान पूर्ण इंसान यानी हज़रत अली अलैहिस्सलाम और उनकी संतान के नाम पर है और इस सूरह का दूसरा नाम 'दह्र' है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हाज अबुल कासिम ने कहा, सूरह इंसान पूर्ण इंसान यानी हज़रत अली अलैहिस्सलाम और उनकी संतान के नाम पर है और इस सूरह का दूसरा नाम 'दह्र' है।

उन्होंने कहा कि इतिहास में अहले-बैत सबसे अच्छे, श्रेष्ठ और पूर्ण इंसान हैं। इस सूरह से हमें पता चलता है कि दुनिया में दो तरह के इंसान हैं: पहले वे जो बलिदान करने वाले हैं और दूसरे वे जो स्वार्थी और आत्मकेंद्रित हैं, जो दुनिया की हर चीज़ सिर्फ़ अपने लिए चाहते हैं।

हौज़ा के शिक्षक ने ज़ोर देकर कहा,इसार इंसानों के साथ-साथ बलिदानी समुदाय भी हैं, जो त्याग करने वाले हैं। इसके विपरीत, कुछ समुदाय स्वार्थी और आत्मकेंद्रित हैं, जिनमें अमेरिका और नकली इज़राइली शासन प्रमुख उदाहरण हैं।

क़ुरआन के व्याख्याकार ने कहा कि अल्लाह तआला इस सूरह में बलिदानी इंसानों की विशेषताओं का ज़िक्र करता है। सूरह इंसान की आयत सात में अल्लाह पर विश्वास को बलिदानी इंसानों की पहली विशेषता बताया गया है, जो पूरी तरह से अल्लाह पर विश्वास रखते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हाज अबुल कासिम ने याद दिलाया,आख़िरत पर विश्वास बलिदानी इंसानों की दूसरी पहचान है और वे जानते हैं कि आज के बाद एक कल है और वे अनंतता में विश्वास रखते हैं।

उन्होंने आगे कहा,उनकी तीसरी विशेषता यह है कि वे कुर्बानी देने वाले हैं, अपनी इच्छाओं को पीछे छोड़ते हैं, दूसरों की ज़रूरतों को अपनी ज़रूरतों से ऊपर रखते हैं और कुर्बानी व दान करने वाले हैं।

अल्लाह ने बलिदानी और कुर्बानी देने वाले इंसानों के लिए विभिन्न नेमतें रखी हैं। क़यामत के दिन ये लोग खुश होंगे और अल्लाह की सज़ा से सुरक्षित रहेंगे और हमेशा रहने वाली जन्नत में बसेंगे।

उन्होंने कहा, पूर्ण और बलिदानी इंसान उच्च जन्नत में बसाए जाएँगे और उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होगी और जन्नत के पेड़ों की छाँव उनके लिए सुकून का सबब बनेगी।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हाज अबुल कासिम ने ज़ोर देकर कहा,बलिदानी और कुर्बानी देने वाले इंसान अपने काम का बदला नहीं चाहते, लेकिन अल्लाह इन कामों के लिए उनका शुक्रिया अदा करता है और अनंत सवाब देता है और ये लोग क़यामत में बड़ी इज़्ज़त में होंगे। आत्मकेंद्रित, स्वार्थी और दुनियादार लोग आख़िरत से ग़ाफिल हैं और क़यामत में उनके सामने मुश्किल दिन होगा।

अतं में उन्होने कहां, हौज़ा के शिक्षक ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कि अहले-बैत का तरीक़ा बलिदान और कुर्बानी है, कहा: वह समुदाय जो अपने साथियों के लिए बलिदान करता है, वास्तव में अहले-बैत के अनुयायी हैं और जो लोग दुश्मनों का रास्ता अपनाते हैं और अपने मकसद के लिए दुनिया के मज़लूमों को शहीद करते हैं वे क़यामत में अल्लाह की सज़ा भुगतेंगे और दुनिया में भी अपमानित होंगे।

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