कुर्बानी (9)
-
धार्मिकआशूरा की घटना आज तक क्यों ज़िंदा है?
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने 10 मुहर्रम 61 हिजरी को अपना सब कुछ क़ुर्बान करके यह साबित कर दिया कि दीन, हक़ और उसूलों पर कभी समझौता नहीं किया जा सकता।
-
दुनियातंज़ानिया के शियो की इमाम हुसैन (अ) के आदर्शों के साथ पुनः बैअत
हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन शेख़ हमीद जाल्लाह मवाकिंदेंघे, तंज़ानिया शिया समुदाय के वरिष्ठ शेख़ और इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) मदरसे के निदेशक, ने आशूरा के अवसर पर आयोजित विशाल और शांतिपूर्ण जुलूस…
-
दुनियातुर्की के पूर्व संस्कृति मंत्री: अगर इमाम हुसैन (अ) बैअत कर लेते, तो इस्लाम की रूह ख़त्म हो जाती
अगर इमाम हुसैन (अ) यज़ीद के सामने झुक जाते और बैअत कर लेते, तो इस्लाम की हक़ीक़ी रूह समाप्त हो जाती। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ) ने इस्लाम की रक्षा के लिए अपना जीवन, परिवार और अपनी सबसे प्रिय…
-
धार्मिकईद उल अज़हा : इंसानियत, ईसार और कुर्बानी का पैग़ाम
ईद-उल-अज़हा ख़ुदावंदी इताअत, इबराहीमी ईसार और इंसानियत नवाज़ी का अज़ीम पैग़ाम लेकर आती है। यह मुबारक दिन हमें याद दिलाता है कि अल्लाह तआला की रज़ा के सामने दुनिया की हर प्यारी चीज़ क़ुरबान की…
-
धार्मिकशरई अहकाम | मुस्तहब कुर्बानी का समय
हज़रत आयतुल्लाह शहीद सय्यद अली ख़ामेनेई ने मुस्तहब कुर्बानी के समय के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दिया है।
-
उलेमा और मराजा ए इकरामजनता ने अपनी कुर्बानियों से ईरान की धरती को सम्मानित किया: आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली
आयतुल्लाहिल उज़मा अब्दुल्लाह जवादी आमोली ने जनता की दृढ़ता और कुर्बानियों को सलाम करते हुए कहा है कि लोगों ने अपनी बेमिसाल उपस्थिति और त्याग के माध्यम से इस धरती को सम्मान और गौरव प्रदान…
-
ईरानअहले बैत (अ) का मार्ग,कुर्बानी का मार्ग हैः हुज्जतुल इस्लाम मुहम्मद हाज अबुल कासिम
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हाज अबुल कासिम ने कहा, सूरह इंसान पूर्ण इंसान यानी हज़रत अली अलैहिस्सलाम और उनकी संतान के नाम पर है और इस सूरह का दूसरा नाम 'दह्र' है।
-
धार्मिकहज़रत उम्मुल बनीन (स) अख्लाक व धैर्य और ज़िम्मेदारी का नाम है: मौलाना मुहम्मद नदीम अब्बास अलवी
हौज़ा / हज़रत उम्मुल बनीन स.ल. का जीवन एक ऐसा प्रकाश है जो समय बीतने के साथ मद्धम नहीं होता, बल्कि हर युग की महिला का मार्गदर्शन करता है। आपके चरित्र में प्रेम भी है, धैर्य भी है, बलिदान भी है…
-
क़ुरआन की रौशनी में:
धार्मिकशहीद होना;अल्लाह तआला की राह में क़ुर्बानी की विशेषता है
हौज़ा / शहीदों का नाम ज़िंदगी और अमर होने की मांग करता है। यानी ख़ुदा की राह में क़ुर्बानी की ख़ासियत और पहचान यह है कि शहीद का नाम दुनिया में हमेशा अमर रहता है।