गुरुवार 29 जनवरी 2026 - 18:55
नई दिल्ली; बज़्म-ए-पयम्बरान-ए-सुखन के तत्वाधान मे 'जश्न-ए-सब्रो-वफ़ा' नामक सेशन का आयोजन

बज़्म-ए-पयम्बरान-ए-सुखना, नई दिल्ली ने ज़ुल्फ़िकार बाकिर ज़ैदी साहब की देखरेख में संगम विहार कॉलोनी में दौलत कदा मुग़लज़ादा अख़्तर मिर्ज़ा में 'जश्न-ए-सब्रो-वफ़ा' नाम का एक साहित्यक सेशन ऑर्गनाइज़ किया, जिसमें दिल्ली के जाने-माने शायरों ने हिस्सा लिया और शायरी पेश की।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बज़्म-ए-पयम्बरा-ए-सुखना की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बज़्म-ए-पयम्बरान-ए-सुखना का तीसरा सेशन था। इस सेशन में तिलावत और डायरेक्शन का काम मौलाना एम एम बाबर अज़मती ने किया, जबकि अध्यक्षता मस्जिद इमाम जाफ़र सादिक (अ) नूर इलाही के इमाम जमात मौलाना हैदर अली जाफ़री ने की।

इस नशिस्त के लिए मिस्रा दिया गया था:

है दोनो बाबे शुजाअत हुसैन और अब्बास, जिन पर शायरों ने मनकबती नज़्में पेश कीं।

इस बज़्म के तहत, युवा शायरों को तैयार करने के लिए महीने में एक बार मीटिंग होती है। यह बज़्म आज के ज़माने में नए शायरों की ट्रेनिंग की ज़रूरत को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है। आखिर में, जाने-माने शायरों की चुनी हुई नज़्में पेश की जाती हैं।

खुदा का दीन सकीफ़ाइयो बँट जाता

अगर न करते हिफ़ाजत हुसैन और अब्बास

मुगलज़ादा अख़्तर मिर्ज़ा साखंनवी

सजे जो आमदे महदी पे बज़्म शऊर सुखन

कराऐँ मुझ से निज़ामत हुसैन और अब्बास

मुहम्मद मेहदी साखंनवी

चिराग बुझते ही रोशन चिराग दिल के हुए

बने है रूहे बसारत हुसैन और अब्बास

मास्टर मुशर्रफ साखंनवी

अली है शहर शुजाअत तो यू कहा जाए

है दोनो बाबे शुजाअ हुसैन और अब्बास

मौलाना क़िर्तास नक़वी

अज़ा मे तीरे अक़ामत मे बरछिया खाई

है फिर भी महवे इबादत हुसैन और अब्बास

फ़ज्र मिर्ज़ा सांखनवी

अगर चे महफ़िल और मजलिसे अज़ा खुलूस से हो

तो उसमे करते है शिरकत हुसैन और अब्बास

ज़ुल्फ़िकार बाबर ज़ैदी

वो भाइयों का कभी दिल दुखाए नामुमकिन है

जो पढ़ ले आपकी सीरत हुसैन और अब्बास

मौलाना हैदर अली जाफ़री साहब

सरवर मुस्हफ़े नातिक वजूद हसन क़बूल

चिराग़-ए-क़स्र हिदायत हुसैन और अब्बास

मौलाना बाबर अज़मती साखनवी साहब

उठा के गोद मे दोनों को कह रहे है अली 

है दोनों बाबे शुजाअत हुसैन और अब्बास 

मौलाना रिज़वान साहब

बज़्म का समापन मौलाना हैदर जाफ़री साहब की दुआ के साथ हुआ।

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