हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन और अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष मौलाना तकी अब्बास रिज़वी ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का मुसलमानों के ख़िलाफ़ आक्रामक रवैया, नफ़रत पर आधारित सोच और विवादित बयान देश की सर्वोच्च न्यायपालिका से सख़्त रुख़ की माँग करते हैं, ताकि देश में आपसी अमन-चैन, सद्भाव, गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारा, प्यार और मोहब्बत का माहौल क़ायम रह सके।
मौलाना तकी अब्बास रिज़वी ने कहा कि हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नफ़रत परवर लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई न होना न सिर्फ़ उन्हें और ज़्यादा जुर्रत देता है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के बुनियादी उसूलों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे नफ़रत परवर लोगों को उनके दायरे में रखने के लिए क़ानून की ताक़त का इस्तेमाल करे।
मौलाना तकी अब्बास रिज़वी कलकत्तवी ने कहा कि यह देश आपसी सहिष्णुता, सद्भाव, अमन और भाईचारे का देश है। भारत की जागरूक जनता नफ़रत की राजनीति को स्थायी रूप से कभी बर्दाश्त नहीं कर सकती। आज जिस तरह मुसलमानों के मदरसों, मस्जिदों और ग़रीबों की बस्तियों पर बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं, इतिहास की क़लम उसे लगातार दर्ज कर रही है। हाँ, आज मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़ुल्म-ज़्यादती, नाइंसाफ़ी और नफ़रत भरी बयानबाज़ी एक चलती हुई मुद्रा बन चुकी है, जिसके ज़रिए वोट बटोरे जा रहे हैं, लेकिन यह एक खोटा सिक्का है, जो ज़्यादा दिनों तक नहीं चलेगा।
अहले बैत फ़ाउंडेशन के उपाध्यक्ष मौलाना तकी अब्बास रिज़वी ने कहा कि यह याद रखने की बात है कि नफ़रत की राजनीति देश से वफ़ादारी नहीं, बल्कि उसके अमन और चैन से ग़द्दारी है। हमारा देश गंगा-जमुनी तहज़ीब का अलमबरदार है। देश नफ़रत से नहीं, बल्कि मोहब्बत से चलता है। इस देश के तमाम नागरिक एक गुलदस्ते की तरह हैं; अगर गुलदस्ते का एक भी फूल मुरझा जाए या निकाल दिया जाए, तो गुलदस्ते की ख़ूबसूरती ख़त्म हो जाती है। नफ़रत का मुक़ाबला नफ़रत से नहीं, बल्कि सिर्फ़ मोहब्बत से ही किया जा सकता है। मौजूदा मध्य-पूर्व के राजनीतिक, वित्तीय और आर्थिक हालात को देखते हुए, आज हमारे वतन-ए-अज़ीज़ को नफ़रत नहीं, बल्कि मोहब्बत की ज़रूरत है۔
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