हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , बुशहर, हुज्जतुल इस्लाम सैयद अब्दुलहादी रुक्नी हुसैनी, इमाम ए जुमआ गनावे ने इस हफ़्ते के ख़ुत्बा-ए-नमाज़-ए-जुमआ में नमाज़ियों को तक़वा-ए-इलाही की दावत देते हुए माह-ए-मुबारक शाबान की फ़ज़ीलतों की तरफ़ इशारा किया और कहा: माह-ए-मुबारक शाबान, पैग़म्बर-ए-अकरम (स) पर सलवात भेजने का महीना है और इंसान के आमाल के तराज़ू में सलवात से ज़्यादा भारी कोई अमल नहीं है।
सबसे पहले पैग़म्बर पर दरूद भेजने वाला ख़ुदा है और रसूल की इताअत, ख़ुदा की इताअत है।उन्होंने 11 माह-ए-मुबारक शाबान को हज़रत अली अकबर (अ.स.) की विलादत-ए-बासआदत और यौम-ए-जवान के तौर पर मनाए जाने की तरफ़ इशारा करते हुए कहा, जवानों को चाहिए कि हज़रत अली अकबर (अ.) को अपना नमूना-ए-अमल बनाएँ, उनकी क़द्र करें और उनकी सलाहियतों से फ़ायदा उठाएँ।
अगर जवानों को मुख़्तलिफ़ मैदानों में ज़िम्मेदारी दी जाए तो कभी भी 18 दी की तल्ख़ वाक़िआत की तरफ़ नहीं जाएँगे।
इमाम ए जुमआ गनावे ने 12 बहमन, इमाम ख़ुमैनी (रह.) की वतन वापसी के दिन, और इस्लामी इंक़िलाब की कामयाबी तथा 15 बहमन को इमाम-ए-अस्र (अज.) की विलादत-ए-बासआदत के मौके़ पर मुबारकबाद पेश करते हुए कहा, यह दिन आलमी यौम-ए-मुस्तज़अफ़ीन और सिपाही-ए-गुमनाम-ए-इमाम ज़माना (अज.) के नाम से भी मनाया जाता है, जिनको मुबारकबाद पेश की जानी चाहिए।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा,शब ए निमे शाबान फ़ज़ीलत और क़द्र-ओ-क़ीमत के एतिबार से शबे-क़द्र के बराबर है और रिवायात की रोशनी में इस मुबारक रात को अहया करने की तकीद की।
हुज्जतुल इस्लाम रुक्नी हुसैनी ने एक बार फिर इत्तिहादिया-ए-यूरोप के सिपाह-ए-पासदारान को आतंकवादी क़रार देने के फ़ैसले पर तंबीह करते हुए कहा,यह अमल ख़तरनाक नताइज का सबब बनेगा, लेकिन हम सब सिपाह के सब्ज़ और मुक़द्दस लिबास पर फ़ख़्र करते हैं, जो एक क़ुव्वत है।
उन्होंने ईरान, चीन और रूस के दरमियान होने वाली मुश्तरका फ़ौजी मश्क़ का भी ज़िक्र किया, जो आने वाले इतवार को आयोजित की जाएगी।
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