हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , बीसवीं सदी के इतिहास में इमाम ख़ुमैनी का व्यक्तित्व एक ऐसी व्यापक वास्तविकता है जिसने न केवल ईरान बल्कि वैश्विक राजनीति की धारा को बदल कर रख दिया। इतिहास के आईने में उनके व्यक्तित्व के कुछ प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:
1. एक बहुमुखी विचारक और नेता:
इमाम ख़ुमैनी केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे बल्कि वे एक साथ एक फ़क़ीह, दार्शनिक, आध्यात्मिक ज्ञाता और कूटनीतिज्ञ भी थे। इतिहास गवाह है कि उन्होंने धर्म को केवल व्यक्तिगत पूजा तक सीमित रखने के बजाय इसे एक सामाजिक और राजनीतिक शक्ति के रूप में पेश किया।विलायत-ए-फ़क़ीह का उनका सिद्धांत आधुनिक राजनीतिक इतिहास में एक अनूठा प्रयोग साबित हुआ।
2. इस्लामिक क्रांति के संस्थापक:
1979 की इस्लामिक क्रांति इमाम ख़ुमैनी के नेतृत्व का सबसे बड़ा प्रमाण है।उन्होंने बिना किसी सशस्त्र युद्ध या बाहरी मदद के केवल जन जागरूकता और दृढ़ता के माध्यम से ढाई हज़ार साल पुरानी राजशाही का अंत किया।
सादगी: सत्ता के शिखर पर भी उनकी जीवनशैली एक सामान्य छात्र जैसी ही रही।लोकशक्ति: उन्होंने साबित किया कि अगर जनता और नेतृत्व के बीच विश्वास हो, तो दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति को भी हराया जा सकता है।
3) वैश्विक राजनीति पर प्रभाव:
इमाम ख़ुमैनी ने दुनिया को "ना पूरब, ना पश्चिम" (न शार्की, न ग़र्बी) का नारा दिया। उस दौर में जब दुनिया अमेरिका और सोवियत संघ के गुटों में बंटी हुई थी उन्होंने एक तीसरे रास्ते (इस्लामी स्वायत्तता) की नींव रखी।
उन्होंने मुस्लिम उम्मा के एकता पर ज़ोर दिया और "क़ुद्स दिवस" (यौम-अल-क़ुद्स) की शुरुआत करके फिलिस्तीन मुद्दे को वैश्विक एजेंडे पर जीवित रखा।
4) दृढ़ता और साहस :
ऐतिहासिक दृष्टि से उनके व्यक्तित्व का सबसे मज़बूत पहलू उनका निडर होना था। चाहे वह शाह के समय की निर्वासन अवधि हो या आठ साल लंबा थोपा गया युद्ध उन्होंने कभी भी अवसरवादिता का सहारा नहीं लिया। उनका प्रसिद्ध कथन था,हमें ईश्वर के आदेश का पालन करना है, परिणाम चाहे कुछ भी हो।
निष्कर्ष : इतिहास इमाम ख़ुमैनी को एक ऐसे सुधारक के रूप में याद रखता है जिसने पस्तहाल कौम को स्वाभिमान, स्वाभिमान और आज़ादी का रास्ता दिखाया। उन्होंने राजनीति में नैतिकता और आध्यात्मिकता को शामिल कर एक नया अध्याय जोड़ा।
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