हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ़र्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश/ भारत के जाने-माने धार्मिक विद्वान सय्यद मंज़ूर आलम जाफ़री सिरसिवी ने उत्तर प्रदेश के फ़र्रुखाबाद ज़िले में एक इमामबारगाह और जनाज़े की चिताओं में आग लगाने की घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से तुरंत और असरदार कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि भारत सदियों से सहनशीलता, आपसी सम्मान और गंगा-जमनी तहज़ीब का प्रतीक रहा है, जहाँ संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की गारंटी देता है। ऐसे में धार्मिक जगहों को निशाना बनाना बहुत दुखद और चिंता की बात है, जिससे न सिर्फ एक खास वर्ग की भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि यह देश की आम सांस्कृतिक परंपरा पर भी हमला है।
मौलाना सय्यद मंजूर आलम जाफरी सरसवी के मुताबिक, यह घटना सरकारी व्यवस्था को खुली चुनौती है और फिरकापरस्त तत्वों के बेलगाम होने का सबूत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते ऐसे तत्वों पर काबू नहीं पाया गया, तो इसके गंभीर सामाजिक और राष्ट्रीय नतीजे सामने आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जहां अलग-अलग धर्मों के लोग हज़रत इमाम हुसैन (AS) का गम सम्मान के साथ मनाते हैं और हुसैनी ब्राह्मणों की परंपरा इस बात का सबूत है कि कर्बला की घटना का संदेश पूरी इंसानियत के लिए है। महात्मा गांधी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गांधीजी ने भी इमाम हुसैन (AS) की घटना से सीख लेकर अहिंसा और न्याय के सिद्धांतों को अपनाया था। मौलाना सैयद मंज़ूर आलम जाफ़री सरसवी ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि इस घटना में शामिल सभी लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ एक जैसी और असरदार रणनीति अपनाई जाए और धार्मिक जगहों की सुरक्षा के लिए खास सुरक्षा कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि देश की ज़्यादातर आबादी शांति पसंद है और नफरत और अफ़रा-तफ़री फैलाने वाले तत्वों को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह ऐसे तत्वों को कानून के दायरे में लाए और उन्हें कड़ी सज़ा दे ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक जगहों या धार्मिक भावनाओं को निशाना बनाने की हिम्मत न कर सके।
आखिर में, उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला देश को शांति और सुरक्षा का घर बनाए रखे और लोगों को एकता और भाईचारे से रहने की ताकत दे।
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