हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मुम्बई की खोजा मस्जिद मे जुमा के खुत्बे से संबोधन करते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन मौलाना सय्यद अहमद अली आबिदी ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि रसूले खुदा (स) के स्वर्गवास के बाद से आज तक इस्लामी उम्मत विभिन्न मसाइब और घटनाओ से गुजरती रही है। इस्लाम के दुशमन के षडयंत्र हमेशा मुस्लमानो के दिलो को घायल करते रहे है और इन्ही दर्दनाक घटनाओ मे ईरान के सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनई की शहादत भी एक बड़ी घटना है जिसका दुख आज भी अहले ईमान के दिलो मे ताज़ा है।
उन्होने कहा आगर चे इस दुख के लिए हमारे दिल और हवास तैयार नही थे, लेकिन शहादत वास्तव मे एक बड़ा मकाम है। रिवायत मे आया है कि अमीरुल मोमेनीन (अ) ने एक अवसर पर रसूले खुदा (स) से अर्ज़ किया कि उन्हे शहादत क्यो नही प्राप्त हुई तो रसूले खुदा (स) ने फ़रमाया अल्लाह तआला उन्हे ज़रूर शहादत के अज़ीम दर्ज़ा प्रदान करेगा।
आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली सिस्तानी के प्रतिनिधि ने कहा कि शहादत वह उच्च स्थान है जिसकी तमन्ना एक सच्चा मोमिन प्रतिदिन करता है। अल्लाह तआला ने हमे ऐसी उम्मत मे पैदा किया है जो मौत से डरती नही है बल्कि राहे खुदा मे शहादत को अपने लिए सौभाग्य समझती है। मोमेनीन अपनी दुआओ मे हमेशा यह दुआ करते है कि उन्हे इमाम वक्त के सहायको और उनके सामने शहादत पाने वालो मे शामिल किया जाए।
उन्होने आगे कहा इतिहास मे यह भी मिलता है कि अमीरुल मोमेनीन हज़रत अली (अ) के बारे मे रसूले खुदा (स) ने फ़रमाया था कि आपको बद तरीन व्यक्ति शहीद करेगा। इससे मालूम होता है कि कभी कभी अज़ीम तरीन हस्तिया बद तरीन व्यक्तियो के हाथो शहादत पाती है और यही बात इस शहादत के मकाम को अधिक नुमाया करती है।
मुम्बई के इमाम जुमा ने कहा कि हमे ऐसी परिस्थिति मे धैर्य और अंर्तदृष्टि के साथ जीवन जीना चाहिए और अल्लाह तआला से दुआ करनी चाहीए कि वह उम्मत के शहीद के दरजात को बुलंद फ़रमाए, ईरानी जनता को सफलता प्रदान करे और इस्लाम के दुशमन को अपमानित करे। उन्होने कहा कि जिस प्रकार इतिहास मे बद्र, ओहोद, खंदक़ और ख़ैबर मे दीन के दुशमनो को पराजय हुई, इसी तरह आज भी हक़ को सफ़लता मिले।
मौलाना सय्यद अहमद अली आबिदी ने आगे कहा कि इस्लामी शिक्षाओ मे दुआओ की अत्यधिक महत्व है और दुआओ मे दुशमनो के पतन और हक की मदद का बार बार उल्लेख किया गया है। अगर इंसान इखलास के साथ दुआ करे तो अल्लाह तआला ज़रूर उसे स्वीकार फऱमाता है उन्होने कहा कि हमारा खुदा वह है जो बड़े बड़े अत्याचारीयो को गिरा देता है कमज़ोरो को उच्च स्थान प्रदान करता हैष
उन्होने कहा कि तारीख इस बात की साक्षी है कि जब फ़िरऔन अपनी शक्ति के शीर्ष पर था तो अल्लाह तआला ने इसे डुबा दिया और हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और उनके साथीयो को निजात प्रदान की। यही इलाही सुन्नत आज भी जारी है और अत्याचारी चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यो न हो, अंतः पराजय उनका भाग्य बनती है।
मुम्बई के इमाम जुमा ने अपने संबोधन के अंत मे कहा कि अहले ईमान को कदापि निराश नही होना चाहिए, अल्लाह तआला का वादा है कि अंतः हक को सफलता और अत्याचार को पराजय मिलेगी, और एक दिन दुनिया मे न्याय और इंसाफ की प्रणाली स्थापित होगी। और अहले बैत (अ) का झंडा ऊंचा होगा।
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