शुक्रवार 13 मार्च 2026 - 19:22
क्षेत्र मे शांति की स्थापना के लिए इज़रायली शासन का ख़ात्मा ज़रूरी हैः आयतुल्लाह ख़ात्मी

तेहरान के इमाम जुमा ने कहा कि दुशमन दर अस्ल इस्लाम की बुनयाद से बर सरे पैकार है और इस प्रयास मे मिल्लत की हमासी उपस्थिति एक मूल्यवान पूंजी और सेवा का बड़ा माध्यम है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के इमाम जुमा आयतुल्लाह सय्यद अहमद ख़ात्मी ने इस सप्ताह तेहरान यूनिवर्सिटी मे नमाज जुमा के ख़ुत्बो मकहा कि क्षेत्र मे हक़ीक़ी अमन की स्थापन की बुनयादी शर्त ज़ायोनी शासन का ख़ात्मा है।

उन्होने अपने संबोधन मे सुप्रीम लीडर की शहदात का उल्लेख करते हुए कहा कि कभी मौत इंसान के पास आती है और कभी इंसान खुद मौत का च्यन करता है। सुप्रीम लीडर की शहादत एक च्यनित और सम्मानित मौत थी। उन्होने कहा कि हम सबने क्रांति के नेता के पहले संदेश मे सुना कि उन्होने अपने स्वस्थ हाथ की मुठ्ठी बंद कर रखी थी और अंतिम क्षण तक दुशमनो के खिलाफ़ अज़्म और दृढ़ता के साथ अपने रब से जा मिले।

आयतुललाह ख़ातमी ने आगे कहा जो लोग अल्लाह की बारगाह मे हाज़िर होते है वह दो समूह के होते हैः एक वो जो खाली हाथ जाते है, और दूसरे वह जो नेक कर्मो की पूंजी लेकर जाते है। उनके कहने के अनुसार क्रांति के दोनो नेता दूसरे समूह मे शामिल थे और नेक कर्मो के अजीम ज़खीरे के साथ अल्लाह से मुलहक हुए।

उन्होने कहा कि आंतरिक मैदान मे इमाम खुमैनी ने इस्लामी प्रणाली की स्थापना की जो नेक अमल की जड़ है, जबकि शहीद नेता ने इस प्रणाली को अधिक मजबूत किया। जबकि दुशमनो ने इस अजीम शख्सियत को हमसे जुदा कर दिया, लेकिन उसके तुरंत बाद मजलिस खुबरेगान रहबरी की ओर से नए नेता का च्यन खुद एक महत्वपूर्ण और नेक काम है।

आयतुल्लाह ख़ात्मीन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर दोनो नेताओ की एक बड़ी सेवा फ़िलिस्तीन के मुद्दे को जीवित रखना था। उन्होने कहा कि दुशमन चाहते थे कि फ़िलिस्तीन का मुद्दा केवल अरब जगत तक सीमित रहे, लेकिन इमाम खुमैनी ने रमज़ान के अंतिम शुक्रवार को वैश्विक कुद्स दिवस करार देकर स्पष्ट कर दिया कि यह केवल अबर जगत का नही बल्कि पूरी इस्लामी उम्मत का दुनिया का मुद्दा है।

उन्होने आगे कहा कि इसी मार्ग को जारी रखते हुए शहीद नेता ने भी हमेशा फ़िलिस्तीन को इस्लामी जगत का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा करार दिया, उनके अनुसार इमाम खुमानी ने फ़रमाया था कि इजरायल को दुनिया से मिट जाना चाहिए और हम भी स्पष्ठ रूप से कहते है कि क्षेत्र मे हक़ीक़ी अमन और सुकून की स्थापना के लिए इस अत्याचारी ज़ायोनी सरकार का खात्मा ज़रूरी है।

तेहारन के इमाम जुमा ने कहा कि जब तक अमेरिका और जायोनी शासन मौजूद है, मानवता को वास्तविक शांति नसीब नही होगी। उन्होने आशा व्यक्त की कि इस्लाम के मुजाहेदीन उन शक्तियो को पराजिक करके दुशमनो को पशेमान करेंगे। उन्होने मीनाब मे मासूम बच्चो की हत्या की घटना को भी याद करते हुए कहा कि यह अत्याचार अमेरिका की देखरेख मे हुआ और यह दाग हमेशा के लिए अमेरिका के दामन पर रहेगा। 

उन्होने बुध के दिन सशस्त्र सेना के कमांडरो और अवामी शहीदो की अंतिम संस्कार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन शहीदो का खून कभी बेकार नही जाएगा और यह दिन हमारी कौम के लिए एतिहासिक और गर्व का कारण है। उनके अनुसार आलमी उपनिवेशवाद ने ईरान के खिलाफ़ अपनी चौथे युद्ध पर मुसल्लत की है।

आयतुल्लाह ख़ात्मी ने व्याख्या करते हुए कहा कि क़ुरआन के सूर ए बकरा की आयत के अनुसार दुशमन वास्तव मे इस्लाम की बुनयाद के खिलाफ बर सरे पैकार है। उन्होने कहा कि आठ वर्षीय युद्ध, बारह दिवसीय युद्ध और तीसरा युद्ध जो शहीद नेता के अनुसार एक तरह की नीम बग़ावत थी, के बाद अब हम चौथे युद्ध के चरण मे है जिसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता जनता की भरपूर भागीदारी और दृढ़ता है।

उन्होने कहा कि जब जनता मैदान मे मौजूद हो तो दुशमन कुछ भी नही कर सकता। दुशमन की सोच थी कि प्रणाली के नेता को निशाना बनाकर पूरी प्रणाली को कमजोर कर देगा, किंतु वह यह बात समझने मे असफल रहा कि इस्लामी प्रणाली किसी एक व्यक्ति पर स्थापित नही बल्कि जनता की ताकत पर स्थापित है और इसका असली मालिक जनता है।

उनहोने कहा कि मजलिस खुबरेगान रहबरी ने समय रहते अपने कर्तव्य पूरा करते हुए एक सालेह और योग्य व्यक्ति आयतुल्लाह सय्यद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनई को नेता के रूप मे च्यन किया। उनके अनुसार यह च्यन बुद्धि और दानिश तथा क़ानून के अनुसार किया गया और नेतृत्व के सभी तकाज़े उनमे मौजूद है।

आयतुल्लाह ख़ात्मी ने कहा वह एक बुद्धिमान और योग्य फ़कीह है जिन्होने नेतृत्व और बुद्धिमान शहीद  नेता के स्कूल से सीखी है। उन्होने कहा कि उनका जामेअ और महत्वपूर्ण संदेश भी जनता ने सुना जिस ने दुशमनो को निराश कर दिया।

उन्होने देश मे पाई जाने वाली एकता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मराज ए तक़लीद, त्रिसात्तामक शक्तियो के प्रमुखो और सशस्त्र सेना ने इस च्यन को बधाई दी, जो वास्तव मे वही एकता है जिस पर इमाम खुमैनी और शहीद सुप्रीम लीडर हमेशा जोर देते थे।

उन्होने आगे कहा कि आज हम सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह है कि जिस प्रकार इमाम खुमैनी और शहीद नेता का अनुसरण किया गया, उसी प्रकार अब युवा इमाम और क्रांति के तीसरे नेता का भी अनुसरण किया जाए।

आयतुल्लाह ख़ात्मी ने सशस्त्र सेना की गतिविधियो को सराहते हुए कहा कि इस चरण मे उन्होने बेहतरीन परीक्षा दी है। उन्होने कहा कि वह जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए सेना के प्रत्येक सिपाही के हाथ चूमने को तैयार है और आशा करते है कि हम दुशमन को ऐसी सख्त चोट पहुचाँगे कि वह दुबारा ईरान पर हमला करने का साहस न कर सकें।

उन्होने कहा कि ईरानी जनता वह कौम है जो कभी थकती नही, बल्कि अपने दुशमन को थका देती है।

इमाम जुमा ने अपने संबोधन के समापन मे कहा कि इस मैदान मे ईरानी जनता हर स्थिति मे सफल रहेगी और दुशमन अंतः पराजित होगा। उन्होने कहा कि इस्लाम के मुजाहेदीन शहीद नेता, मीनाब के शहीद और दूसरे शहीदो के खून का प्रतिशोध ज़रूर लेंगे। अंत मे उन्होने कहा कि कुद्स दिवस के बड़े जमावडे की सहूलत के लिए खुत्बा संक्षिप्त करते हुए उसे समाप्त किया जा रहा है।

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