शनिवार 7 मार्च 2026 - 08:15
ईरान और हिज़्बुल्लाह की मदद वाजिब ए शरई है

हौज़ा / यमन के उलेमा की अंजुमन ने ईरान और लेबनान में ज़ायोनी शासन और अमेरिका के अपराधों की कड़ी निंदा करते हुए कहा, ख़ुदा के सबसे बड़े दुश्मनों के सामने डटे हुए ईरान और हिज़्बुल्लाह के बहादुर भाइयों की मदद करना एक फ़र्ज़-ए-शरई और ईमान की ज़िम्मेदारी है और इस मामले में तटस्थ रहने की कोई गुंजाइश नहीं है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , यमन के उलेमा ने ईरान और हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ जारी जंग की तुलना ग़ज़वा-ए-बद्र और फ़तह-ए-मक्का से करते हुए कहा,इन ऐतिहासिक घटनाओं को आज की इस्लामी दुनिया की वास्तविकताओं और मौजूदा हालात से जोड़कर देखने की ज़रूरत है।

अंजुमन ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी अड्डों को जो बाहरी और आक्रामक ताक़तों के केंद्र हैं, निशाना बनाने को जायज़ क़रार दिया और कहा,यमनी क़ौम को जंग के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए और अधिक जागरूकता और तैयारी करनी चाहिए।

यमन के उलेमा अंजुमन के महासचिव आल्लामा तह अल-हाज़री ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि ग़ज़वा-ए-बद्र और फ़तह-ए-मक्का इस्लाम की दो महान मिसालें हैं जिनकी आज के दौर में ताग़ूती ताक़तों के मुक़ाबले में मुसलमानों को सख़्त ज़रूरत है।उन्होंने कहा,राह-ए-ख़ुदा में शहादत का सबसे बड़ा सम्मान मक़ाम-ए-मुअज़्ज़म रहबरी को नसीब हुआ है।

अल्लामा अलहाज़री ने अमेरिका और इज़राइल की ओर से ईरान पर हमले को पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा पर हमला क़रार देते हुए कहा, हालिया जंग दरअसल हक़ और बातिल के बीच एक निर्णायक लड़ाई है।

ईरान और हिज़्बुल्लाह की मदद वाजिब ए शरई है।

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