हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इराकी अहले सुन्नत मुफ्ती शेख मेंहदी अलसमिदाई ने इस्लाम और इस्लाम की रक्षा करने वाले देशों के समर्थन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा,हर वह मुसलमान जो अत्याचार के सामने चुप रहता है और इस्लाम का बचाव नहीं करता वह इस्लामी उम्माह का हिस्सा नहीं होगा।
उन्होंने गैर-मुसलमानों के साथ सहयोग पर भी चेतावनी दी और कहा,जो व्यक्ति इस्लाम के दुश्मनों की मदद करता है या उनसे दोस्ती का इज़हार करता है, वह खुद भी उन्हीं में से एक हो जाएगा।
लीबिया के अहले सुन्नत मुफ्ती शेख अल-सादिक अल-गरयानी ने भी ईरान की रक्षात्मक कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध क्षेत्र में कुफ्र फैलाने की एक कोशिश है, और इस्लामी गणतंत्र को यह अधिकार है कि वह सियोनिस्ट अतिक्रमण के खिलाफ अपना बचाव करे।
उन्होंने ईरान को सियोनिस्ट खतरे के मुकाबले में सबसे आगे बताया और आगे कहा,यह युद्ध निर्णायक है और कोई भी मुसलमान दुश्मनों के साथ या तटस्थ रुख नहीं अपना सकता।
लीबिया के मुफ्ती ने अंत में इस बात पर जोर दिया कि इस साझा खतरे का सामना करने के लिए इस्लामी एकता आवश्यक है।
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