हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम मुहम्मद रज़ा इस्लामी तब्बार ने कहांं,तज़किया ए नफ़्स इंसान की रिहाई और सफलता की मूल शर्त है। उन्होंने कहा कि यदि इंसान अपने अंदर को सुधारने और पवित्र बनाने में लगा रहे, तो वह सच्ची खुशहाली प्राप्त करता है लेकिन अगर इस पर ध्यान न दे तो वह नुकसान और घाटे में रहेगा।
हुज्जतुल इस्लाम इस्लामी तब्बार ने एक मजलिस को खिताब करते हुए कहां, हज़रत अमीरुल मोमिनीन अली (अ.स.)ने नहजुल बलाग़ा में फरमाया जो व्यक्ति अपने नफ़्स को पवित्र करता है, वही सफल होता है अन्यथा नुकसान में पड़ता है।उन्होंने कहा कि अहले बैत (अ.स.) हर क्षेत्र में उच्चतम विशेषज्ञ हैं वे इलाही ज्ञान के स्रोत हैं।
इस्लामी तब्बार ने आगे कहा कि हज़रत अली (अ.स.) के बयान फसाहत और इंसानी मार्गदर्शन में सबसे ऊँचे स्तर के हैं,अगर नहजुल बलाग़ा में इन्हीं तक सीमित भी किया जाता, तो वह इंसान के लिए हिकमत, उपदेश और चिंतन के लिए पर्याप्त होता।
उन्होंने बताया कि अहले बैत (अ.स.) ने इंसान की पहचान, उसकी कमज़ोरियों, दोषों और गुणों के बारे में जिस ऊँचाई से चर्चा की है उसकी कोई हद नहीं मिलती।
उन्होने कहां,इंसान को दुनियावी, नश्वर चीज़ों में दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए लेकिन जब बात स्थायी चीज़ों की आती है जैसे ख़ुम्स, ज़कात, सदक़ा, नमाज़, रोज़ा, और धर्म व इंक़ेलाब की रक्षा तो वह लापरवाही करता है। जो चीज़ें मिट जाने वाली हैं, उनकी दौड़ में तो आगे बढ़ता है, लेकिन जो चीज़ें रहने वाली हैं, उनसे पीछे हट जाता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इंसान उन लोगों में से न हो जो फ़ायदे को नुकसान और नुकसान को फ़ायदा समझते हैं जो सदक़ा और ख़ुम्स को घाटा समझते हैं, जबकि असल में वह जनता की सेवा और वास्तविक लाभ है; और धोखाधड़ी या दूसरों का माल खाने को लाभ मानते हैं जबकि वह असली नुकसान है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग मौत से डरते हैं और मौक़े को ग़नीमत नहीं समझते वे आख़िरत के लिए सामान इकट्ठा करने के मौक़े गँवा देते हैं।
अंत में कहा,इंसान उन लोगों में से न हो जो छोटे गुनाह को बड़ा और अपने बड़े गुनाह को छोटा समझते हैं या फिर दूसरों के गुनाहों को बड़ा और अपने को मामूली समझते हैं।
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