रविवार 15 फ़रवरी 2026 - 12:28
नमाज़ इंसान को गुरूर और तकब्बुर से पाक करती है।

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम हमीद इफ्तिख़ारी ने कहा है कि नमाज़ इंसान को गुरूर और तकब्बुर से पाक करती है।उन्होंने कहा कि नमाज़ दीन का सुतून और बंदगी का सबसे अहम स्तंभ है। नमाज़ इंसान के अंदर ख़ुदा के सामने झुकने का जज़्बा पैदा करती है और उसे दूसरों के साथ अच्छे अख़्लाक़ और तवाज़ो की तरफ़ ले जाती है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हामदान में वली-ए-फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम हमीद इफ्तिख़ारी ने कहा है कि नमाज़ इंसान को गुरूर और तकब्बुर से पाक करती है।उन्होंने कहा कि नमाज़ दीन का सुतून और बंदगी का सबसे अहम ज़ाहिर है। नमाज़ इंसान के अंदर ख़ुदा के सामने झुकने का जज़्बा पैदा करती है और उसे दूसरों के साथ अच्छे अख़लाक़ और विनम्रता की तरफ़ ले जाती है।

इफ्तिख़ारी ने तकब्बुर की तशरीह करते हुए कहा कि जब इंसान अपने आप को दूसरों से बेहतर और ऊँचा समझे, यही तकब्बुर है। यह बुरी सिफ़त ‘उजब’ यानी ख़ुदपसंदी से पैदा होती है। दरअसल जिसके अंदर कोई कमी होती है, वह उसे छुपाने के लिए घमंड दिखाता है।

उन्होंने इमाम जाफ़र सादिक़ की रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि तकब्बुर इंसान के अंदर छुपी हुई ज़िल्लत (कमज़ोरी) से पैदा होती है। ऐसा शख़्स अपनी कमी को दूर करने के बजाय घमंड के ज़रिए उसे छुपाने की कोशिश करता है। इस गुनाह के लिए रिवायतों में सख़्त अज़ाब की वईद आई है।

उन्होंने कहा कि कमअक्ली और नादानी भी तकब्बुर का सबब बनती है। इमाम अली ने फ़रमाया है कि हिमाक़त तकब्बुर की जड़ है। जितना इंसान अक़्ल और बसीरत से दूर होगा, उतना ही घमंड में मुब्तला होगा।

इफ्तिख़ारी ने कहा कि शैतान भी इंसान को घमंड की तरफ़ ले जाता है। जब इंसान ग़फ़लत में पड़ जाता है तो शैतान उस पर हावी हो जाता है और उसके अंदर बड़प्पन का झूठा एहसास पैदा कर देता है।

उन्होंने तकब्बुर के इलाज के दो रास्ते बताए  इल्मी और अमली।

इल्मी इलाज यह है कि इंसान क़ुरआन, अहादीस और बुज़ुर्गों की बातों का मुताला करे और जाने कि तकब्बुर कितना बुरा गुनाह है।अमली इलाज यह है कि इंसान अपने अंदर तवाज़ो पैदा करे। दूसरों को इज़्ज़त देना, लोगों के लिए खड़े होना और अच्छे अख़लाक़ से पेश आना, घमंड को तोड़ने के अमली तरीक़े हैं।

उन्होंने कहा कि मौत को याद करना और इबादत करना, ख़ास तौर पर नमाज़ पढ़ना, तकब्बुर को ख़त्म करने का अहम ज़रिया है। रुकू और सज्दा इंसान के अंदर ख़ुदा के सामने झुकने का जज़्बा पैदा करते हैं और उसे गुरूर और घमंड से दूर कर देते हैं।

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