हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हौज़ा ए इल्मिया ईरान के बैनुल-अक़वामी उमूर के सरबराह हुज्जतुल इस्लाम सैयद मुफ़ीद हुसैनी कोहसारी ने क़ुम में एक इजलास से ख़िताब करते हुए कहा कि “जंग-ए-रमज़ान” सिर्फ एक जंग नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में बड़ी तब्दीली की शुरुआत है।उन्होंने कहा कि मौजूदा जंगी हालात एक बड़े तारीखी मोड़ की हैसियत रखते हैं।
जंग-ए-रमज़ान को सिर्फ एक इलाक़ाई टकराव समझना सही नहीं है, बल्कि इससे दुनिया का पुराना निज़ाम कमज़ोर हो रहा है और एक नया तवाज़ुन बन रहा है, जो महाज़-ए-मुक़ावमत के हक़ में जा रहा है।
उन्होंने मज़ीद कहा कि अब इस ख़ित्ते में अमरीका पर पूरा इनहिसार कम होता जा रहा है और इज़राईली पॉलिसियों से दूरी बढ़ रही है, जबकि महाज़-ए-मुक़ावमत अब सिर्फ दिफ़ा तक महदूद नहीं रहा, बल्कि एक मज़बूत और मोअस्सिर ताक़त बन चुका है।
सैयद मुफ़ीद हुसैनी कोहसारी ने यह भी कहा कि इस जंग के दौरान एक नई साइबर फ़ौज सामने आई है, जिसमें मुख़्तलिफ़ मुमालिक और मज़ाहिब के लोग शामिल हैं, जो हक़ीक़त को समझकर मुक़ावमत की हिमायत कर रहे हैं।
उन्होंने मुबल्लिग़ीन को हिदायत दी कि वो सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट्स पर इनहिसार न करें, बल्कि लोगों से सीधा राब्ता बढ़ाएँ, क्योंकि एक शख़्स को क़ाइल करना हज़ारों ग़ैर-हक़ीक़ी व्यूज़ से ज़्यादा असरदार होता है।
आख़िर में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में काम करते वक़्त एहतियात, नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और इल्म में इज़ाफ़ा बहुत ज़रूरी है, और कामयाबी के वक़्त गुरूर के बजाय अल्लाह से मदद माँगनी चाहिए और इस्तिग़फ़ार करना चाहिए।
आपकी टिप्पणी